नई दिल्ली. कैराना में लोकसभा उपचुनाव में वोटों की गिनती जारी है. रुझानों में आरएलडी, सपा, कांग्रेस गठबंधन आगे चल रही है. दूसरी तरफ कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब रही. ऐसे में उसे एक मनोवैज्ञानिक फायदा बहुत हद तक हुआ होगा. दूसरी तरफ उपचुनाव में लोकसभा की सीट हारने से साल 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले बीजेपी का आत्मविश्वास घटेगा. आइए 8 प्वाइंट से जानते हैं संयुक्त विपक्ष के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपचुनाव… Also Read - पवार बोले- देश में 1977 जैसे हालात, विपक्ष को एकजुट करने के लिए सूत्रधार बनने को तैयार हूं

1. साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 282 सीट मिली थी. अब उसके पास 272 सीटें हैं. ऐसे में देखा जाए तो उसकी 10 सीट घट गई है. वह सामान्य बहुमत के मुहाने पर खड़ी है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि साल 2014 के बाद वह 6 उपचुनाव हार चुकी है. Also Read - कैराना-नूरपुर लोकसभा उप चुनाव: आम आदमी पार्टी का गठबंधन प्रत्याशी को समर्थन, अखिलेश ने कहा- स्वागत है

2. बीजेपी के 272 सीटों पर आने से एनडीए को कोई झटका तो नहीं लगेगा, लेकिन अब उपचुनाव हारने से उसपर मनोवैज्ञानिक दबाव तो बढ़ेगा ही. पहले ही वह गुजरात में सरकार बनाने के नजदीक पहुंचकर हार चुकी है. Also Read - कैराना उपचुनाव: सिंबल RLD का, पर लड़ेगा SP का प्रत्याशी, गोरखपुर की तरह बीजेपी को मात देने की तैयारी

3. ऐक तरह से देखा जाए तो साल 2014 के बाद लोकसभा चुनाव में उसे सबसे बड़ी हार फूलपुर और गोरखपुर में देखने को मिली. जहां उसके सीएम और डिप्टी सीएम की सीट वह नहीं बचा पाई. यहां सपा-बसपा गठबंधन ने उसे बुरी तरह से पटखनी दी.

4. कैराना लोकसभा चुनाव में भी चुनाव काफी दिलचस्प है. यहां बीजेपी को सपा, कांग्रेस, बसपा और आरएलडी गठबंधन की तबस्सुम से मुकाबला करना पड़ा. यहां भी फूलपुर और गोरखपुर जैसी ही स्थिति है. ऐसे में 2019 में अगर ये गठबंधन बना रहता है तो बीजेपी के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है.

5. यूपी की नूरपुर सीट का रिजल्ट भी काफी महत्वपूर्ण है. यहां बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ एसपी कैंडिडेट नैमुल हसन को रालोद का समर्थन मिला है. बसपा ने यहां कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऐसे में इसे भी 2019 के पहले विपक्ष के गठबंधन के ट्रायल के तौर पर देखा जा रहा है.

6. यूपी के दोनों उपचुनाव साल 2019 में आम चुनाव से पहले बीजेपी बनाम विपक्ष के ट्रॉयल के तौर पर देखा जा रहा है. इस उपचुनाव का रिजल्ट ही आने वाले दिनों में विपक्ष के गठबंधन की रूप रेखा कैसी होगी ये तय करेगा.

7. महाराष्ट्र के पालघर और भंडारा-गोंडिया लोकसभा सीट पर चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण है. इसे शिवसेना और बीजेपी के टकराव के रूप में देखा जा रहा है. पालघर में बीजेपी और शिवसेना में सीधी टक्कर है. वहां भंडारा-गोंडिया में बीजेपी और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के प्रत्याशी के बीच सीधा मुकाबला है. ऐसे में यहां पर भी बीजेपी और कांग्रेस दोनों गठबंधन का भविष्य कैसा रहेगा, इसका निर्धारण हो सकता है.

8. बिहार के जोकिहाट विधानसभा में जेडीएयू और आरजेडी पर सबकी नजर रहेगी. मार्च में अररिया में हुए लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने बीजेपी की सीट जीत ली थी. आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस के महागठबंधन के टूटने के बाद हुए इस चुनाव में आरजेडी ने बीजेपी-जेडीयू को बड़ा झटका दिया था. अगर आरजेडी ये उपचुनाव भी जीत जाएगी तो उसका आत्मविश्वास निश्चित तौर पर बढ़ेगा.