नई दिल्ली/मुंबई: देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी(एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) ‘सांप्रदायिक एजेंडे’ हैं जिनके तहत देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान से वंचित करने तथा भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने का प्रयास हो रहा है. Also Read - कोरोनावायरसः पुलिस ने खाली कराया शाहीन बाग, सौ दिन से चल रहा था CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट

जमीयत की कार्यकारिणी की बैठक और अधिवेशन से पहले मदनी ने यह उम्मीद भी जताई कि सीएए के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय बेहतर और स्वीकार्य निर्णय देगा. उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक फायदे के लिए कुछ लोग अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच दीवार खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं. इससे देश के हालात चिंताजनक हो रहे हैं. Also Read - दिल्‍ली के शाहीन बाग धरनास्थल पर फेंका गया पेट्रोल बम

सांप्रदायिक एजेंडे के तहत लाए गए NRC, CAA, NPR
मौलाना मदनी ने दावा किया कि एनआरसी, सीएए और एनपीआर सांप्रदायिक एजेंडे के तहत लाए गए हैं. इस एजेंडे के तहत भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने और धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान से वंचित करने का प्रयास हो रहा है. उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक और अधिवेशन में इन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के साथ ही कई अन्य मसलों पर भी बातचीत होगी. Also Read - जनता कर्फ्यू में शामिल नहीं होंगी शाहीन बाग की दादियां, कहा- यहां मरना पसंद करूंगी