Kerala govt Move To Supreme Court Against CAA: देशभर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. बीते कल विपक्षी दलों ने इस बाबत सोनिया गांधी के आवास पर एक बैठक का भी आयोजन किया था. इस बीच पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है. केरल सरकार का कहना है कि संशोधित कानून भारतीय संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार के प्रावधानों के खिलाफ है. Also Read - केन्द्र के नियमन में डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई करने के कोई प्रावधान नहीं: सुप्रीम कोर्ट

केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के साथ ही केरल नागरिकता कानून को न्यायालय ले जाने वाला पहला राज्य बन चुका है. अब तक सीएए पर कई राज्यों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं लेकिन अब तक किसी ने कोर्ट का रुख नहीं किया है. केरल की एलडीएफ सरकार ने नागरिकता अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम और विदेश अधिनियम अधिनियम को भी चुनौती दी है. Also Read - Tandav Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "कई बार अश्लील कंटेंट दिखाते हैं कुछ OTT प्लेटफॉर्म, स्क्रीनिंग जैसा कोई नियम बनाए केंद्र"

केरल सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि सीएए को संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के उल्लंघन के रुप में घोषित करना चाहिए. बता दें कि अनुच्छेद 14, 21 और 25 भारत में धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं. अनुच्छेद 14 सभी के लिए समानता के अधिकार का वादा करता है जबकि अनुच्छेद 21 कहता है कि “कोई भी व्यक्ति कानून द्वारा स्थापित एक प्रक्रिया को छोड़कर अपने जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं होगा” और अनुच्छेद 25 कहता है “सभी व्यक्ति समान रूप से विवेक की स्वतंत्रता के हकदार हैं”. Also Read - परिवार के 7 सदस्‍यों की हत्‍या की दोषी शबनम को रामपुर से बरेली जेल भेजा, जानिए क्‍यों?