नई दिल्ली: देश भर में नागरिकता विधयेक के खिलाफ जम कर प्रदर्शन हो रहे हैं. इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हुई. प्रदर्शन शुरू होने के कुछ घंटों के बाद से ही पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की नजर इन विद्यार्थियों पर टिकी हुई थी. ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए छात्रों पर लाठी चार्ज किया और उनकी पिटाई भी की. पुलिसकर्मियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने बिना किसी आधिकारिक आज्ञा के यूनिवर्सिटी के अंदर दाखिला लिया और छात्रों के ऊपर बर्बता दिखाई.

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इसी के मद्देनजर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने विगत रविवार को परिसर में पुलिस के प्रवेश करने के मामले में अपनी रिपोर्ट मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय को सौंप दी है. इसमें घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है. विश्वविद्यालय ने इससे पहले इस संबंध में 15-16 दिसंबर को रिपोर्ट सौंपी थी. मंत्रालय को 20 दिसंबर को सौंपी नयी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए समिति गठित करने या न्यायिक जांच कराने की मांग दोहराई है.

जामिया के रजिस्ट्रार की ओर से दाखिल रिपोर्ट में विश्वविद्यालय ने रेखांकित किया है कि पुलिस ने मथुरा रोड और जुलेना रोड पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया. इसके बाद प्रदर्शनकारी मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग पर पीछे हट गए जो विश्वविद्यालय परिसर से गुजरता है.

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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भीड़ को पीछे धकेलते हुए पुलिसकर्मियों ने द्वार संख्या चार और द्वार संख्या सात पर लगे तालों को तोड़ दिया तथा गार्डों की पिटाई करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में घुस गए. उन्होंने पुस्तकालय में आंसू गैस के गोले छोड़े और वहां पढ़ रहे छात्रों की बर्बरता से पिटाई की.’’ रिपोर्ट में कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन से परिसर या पुस्तकालय में प्रवेश करने की पुलिस ने अनुमति नहीं ली थी.