नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) में धार्मिक आधार पर नागरिकता देने के प्रावधानों को विभाजनकारी करार देते हुए कांग्रेस ने बुधवार को इस विधेयक को संविधान के विरुद्ध करार दिया. कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार की यह दलील तर्कसंगत नहीं है कि पिछले 70 सालों में अन्य देशों से भारत आने वाले प्रताड़ित लोगों को नागरिकता नहीं दी गई.

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में पेश विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उच्च सदन में शर्मा ने कहा कि आपके द्वारा लाया गया बिल भारतीय संविधान की नींव पर हमला है, यह भारत गणराज्य पर हमला है. इससे भारत की आत्मा आहत होती है. यह हमारे संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है. यह नैतिकता परीक्षण में विफल रहता है.

शर्मा ने कहा कि इससे पहले पड़ोसी देशों से ही नहीं, बल्कि श्रीलंका, केन्या और युगांडा सहित अन्य देशों से भी भारत आने वाले शरणार्थियों को शरण दी गई. इसके लिए नागरिकता कानून में 9 बार संशोधन किया गया, लेकिन एक बार भी धार्मिक आधार पर नागरिकता नहीं दी गई.

इस बिल का विरोध कर रहे हैं
कांग्रेस नेता ने कहा, भारतीय संविधान धार्मिक आधार पर भेदभाव का स्पष्ट निषेध करता है. संविधान की इस मूल भावना का पालन करते हुए मानवीय आधार पर नागरिकता दी गई. इसलिए हम धार्मिक आधार पर नागरिकता देने को संविधान के विरुद्ध मानते हुए इस बिल का विरोध कर रहे हैं.

सावरकर पर लगाया द्विराष्ट्र सिद्धांत का  आरोप 
शर्मा ने लोकसभा में इस विधेयक पर जवाब के दौरान गृह मंत्री द्वारा धार्मिक आधार पर देश के विभाजन के लिए कांग्रेस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराने को गलत बताते हुए कहा, 1943 में सावरकर जी ने औपचारिक रूप से घोषणा कर दी थी कि मुझे जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत के प्रस्ताव से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने इसके लिए कांग्रेस को दोष दिए जाने को गलत बताया.

प्रतिबद्धता को ‘राजहठ’ करार द‍िया 
शर्मा ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर देश के विभाजन में अंग्रेजों की भूमिका का जिक्र क्यों नहीं किया जाता है. कांग्रेस नेता ने विधेयक को भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा होने के कारण इसे लागू करने की प्रतिबद्धता को ‘राजहठ’ करार देते हुए कहा, किसी दल का घोषणापत्र संविधान से नहीं टकरा सकता है, ना उसके ऊपर जा सकता है. लेकिन हम सभी ने संविधान की शपथ ली है इसलिये हमारे लिए पार्टी का घोषणापत्र नहीं संविधान सर्वोपरि है.

 हर धर्म के प्रताड़ित व्यक्ति को शरण दी गई है
शर्मा ने एनआरसी को पूरे देश में लागू करने के सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश में हिरासत शिविर बनाने के लिए जगह ले ली गई है.कांग्रेस नेता शर्मा ने स्वामी विवेकानंद के एक मशहूर भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसमें हर धर्म के प्रताड़ित व्यक्ति को शरण दी गई है.

पटेल वास्तव में बहुत क्रोधित होंगे
राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, हमारे धर्म में, हम पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं, और हम अपने बुजुर्गों से मिलते हैं. इसलिए अगर सरदार पटेल मोदी जी से मिलते हैं तो वे उनसे बहुत नाराज होंगे, गांधी जी को बहुत दुख होगा, लेकिन पटेल वास्तव में बहुत क्रोधित होंगे.

सरकार को गांधी के चश्मे ही नहीं,  नजरिए को भी अपनाना चाहिए
शर्मा ने मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपने प्रचार अभियानों में उपयोग किए जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को गांधी के चश्मे ही नहीं, उनके नजरिए को भी अपनाना चाहिए.

बंगालियों को राष्ट्रभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है: टीएमसी नेता
चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने नरेंद्र मोदी नीत सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि यह भारत और बंगाल विरोधी है. उन्होंने कहा कि बंगालियों को राष्ट्रभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है और अंडमान के जेलों में बंद कैदियों में 70 प्रतिशत बंगाली थे. उन्होंने बंगाल के कई स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेज भी भारतीय लोगों की मनोस्थिति को नहीं तोड़ पाए.

यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी जाएगा
टीएमसी नेता कहा कि आज कुछ लोग बंगाल के हितैषी बन रहे हैं. उन्होंने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा और यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी जाएगा. ब्रायन ने आरोप लगाया कि यह सरकार ‘‘‘नाजियों’’ की तरह कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार देश के नागरिकों को आश्वासन देने के लिहाज से काफी अच्छी है लेकिन अपने वादों को तोडने के लिहाज से और भी अच्छी है.