नई दिल्ली. इसी साल, महज 3 महीने पहले सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर ऐतिहासिक फैसला दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों द्वारा ऑनलाइन आधार ऑथेंटिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था. अदालत के इस फैसले के अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, केंद्र सरकार दूरसंचार कंपनियों की गुहार पर इस संबंध में कानून में संशोधन करने जा रही है. सरकार ने मोबाइल नंबर तथा बैंक खातों को बायोमीट्रिक पहचान वाले आधार कार्ड से स्वैच्छिक रूप से जोड़ने को कानूनी रूप प्रदान करने के लिए इससे संबंधित दो कानूनों में संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाने के प्रस्तावों को सोमवार को मंजूरी दी. सूत्रों ने यहां इसकी जानकारी दी.

सूत्रों ने कहा कि इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने टेलीग्राफ अधिनियम और मनी लांडरिंग रोकथाम अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्तावित विधेयकों के मसौदों को मंजूरी दी. यह निर्णय निजी कंपनियों को ग्राहकों के सत्यापन के लिए जैविक यानी बायोमीट्रिक पहचान वाले आधार कार्ड के इस्तेमाल पर उच्चतम न्यायालय की रोक के बाद किया गया है. अदालत ने इस तरह के उपयोग के लिए कानूनी प्रावधान न होने के मद्देनजर यह रोक लगाई थी.

इन कानूनों में प्रस्तावित संशोधन इसी के मद्देनजर किए जा रहे हैं. सूत्रों ने कहा कि दोनों अधिनियमों को संशोधित किया जाएगा, ताकि नया मोबाइल नंबर लेने या बैंक खाता खोलने के लिए ग्राहक स्वेच्छा से 12 अंकों वाली आधार संख्या को साझा कर सकें. उच्चतम न्यायालय ने आधार अधिनियम की धारा 57 को निरस्त कर दिया था. यह धारा सिम तथा बैंक खाता के साथ आधार को जोड़ना अनिवार्य बनाती थी. इस समस्या से निजात पाने के लिए टेलीग्राफ अधिनियम को संशोधित किया जा रहा है. इससे आधार के जरिए सिमकार्ड जारी करने को वैधानिक समर्थन मिलेगा. इसी तरह मनी लांडरिंग रोकथाम अधिनियम में संशोधन से बैंक खातों से आधार को जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा.

सूत्रों के मुताबिक, दोनों मौजूदा कानूनों में प्रस्तावित संशोधन हो जाने के बाद नया मोबाइल कनेक्शन लेने और बैंक खाता खोलने के लिए लोग अगर चाहेंगे तो 12 अंक वाली पहचान संख्या साझा कर सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इसमें बाधक नहीं होगा. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को ही खारिज कर दिया था. इस कानून के तहत पहले सिम कार्ड और बैंक खाते के साथ आधार को जोड़ना अनिवार्य था. कोर्ट के फैसले से पहले ग्राहकों को अपने मोबाइल नंबर से आधार को जोड़ना पड़ता था. जाहिर है कि टेलीकॉम कंपनियों की गुहार पर अब सरकार इस कानून में ही संशोधन करने जा रही है.

(इनपुट – एजेंसी)