नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर चल रही रस्साकसी के बीच कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी है. सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट ने ये सिफारिश महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम आने के 18 दिन के बाद भी सरकार न बन पाने की स्थिति में की है. हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगना तय है. वहीं, शिवसेना ने केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का भी ऐलान कर दिया है. यानी शिवसेना ने राष्ट्रपति शासन के खिलाफ याचिका दायर करेगा.

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एक दिन पहले ही शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया था, लेकिन शिवसेना ने उनसे दो और दिन का समय मांगा था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार नहीं किया था. इसके बाद एनसीपी को राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्यौता दिया. आज एनसीपी नेताओं को राज्यपाल से मिलने भी जाना है.

इससे पहले ही पूरे राजनीतिक हालात पर नजर रख रही केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार नहीं बनने की स्थिति में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दी है. अब देखना ये है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद क्या फैसला करते हैं.

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बता दें कि बीजेपी शिवसेना ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था. बीजेपी को 105, शिवसेना को 56 सीटों के साथ सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत भी मिल गया था, लेकिन शिवसेना ढाई-ढाई साल सरकार चलाने की शर्त रख दी. इसके बाद हालात इतने बिगड़े कि बीजेपी ने शिवसेना की शर्तें न मानते हुए सरकार बनाने से इंकार कर दिया. वहीं, शिवसेना 30 साल पुरानी दोस्ती तोड़ते हुए बीजेपी से अलग हो गई. केंद्र की कैबिनेट में शामिल शिवसेना नेता अरविंद सावंत ने कैबिनेट से इस्तीफ़ा भी दे दिया.

इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस (44 सीट) और एनसीपी (56 सीट) से समर्थन माँगा. एनसीपी समर्थन देने को तैयार तो हो गई, लेकिन कांग्रेस इस बारे में अब तक कोई फैसला नहीं कर सकी है. सोनिया गांधी ने एनसीपी और कांग्रेस नेताओं से कई दौर की बैठकें की, लेकिन इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका. वैचारिक रूप से बिलकुल अलग शिवसेना के साथ सरकार में शामिल हुआ जाए या नहीं, इसे लेकर कांग्रेस अब तक कोई फैसला नहीं कर सकी.