नई दिल्ली. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान हुआ राफेल लड़ाकू विमान का सौदा पूर्ववर्ती संप्रग (यूपीए) सरकार द्वारा की गई पेशकश की तुलना में सस्ता है. संसद में बुधवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, राजग सरकार के तहत हुआ राफेल सौदा पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान इस सौदे पर हुई वार्ता पेशकश की तुलना में 2.86 प्रतिशत सस्ता है.

बता दें कि कैग की रिपोर्ट को लेकर कपिल सिब्बल ने सवाल उठाए थे. उन्होंने इस मामले में हितों के टकराव की बात उठाई है. सिब्बल ने कहा है कि मौजूदा कैग राजीव महर्षि सौदे के समय वित्त सचिव थे और इस सौदे से जुड़े थे ऐसे में उन्हें इसकी ऑडिट से अपने को अलग कर लेना चाहिए. हालांकि, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सिब्बल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘मनगढ़ंत’ तथ्यों के आधार पर कांग्रेस कैग जैसे संस्थान पर कलंक लगा रही है.

सिब्बल ने उठाए हैं सवाल
सिब्बल ने कहा कि महर्षि 24 अक्टूबर 2014 से 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव थे. इसी बीच में प्रधानमंत्री मोदी 10 अप्रैल 2015 को पेरिस गए और राफेल सौदे पर हस्ताक्षर की घोषणा की. सिब्बल ने कहा, वित्त मंत्रालय ने इस सौदे की बातचीत में अहम भूमिका निभाई. अब यह साफ है कि राफेल सौदा राजीव महर्षि के की निगरानी में हुआ. अब वह कैग के पद पर हैं. हमने उनसे दो बार मुलाकात की 19 सितंबर और चार अक्टूबर 2018 को. हमने उनसे कहा कि इस सौदे की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है. लेकिन वह खुद के खिलाफ कैसे जांच शुरू कर सकते हैं.