नई दिल्ली/कोलकाता. कलकत्ता हाईकोर्ट से गुरुवार को बीजेपी को एक बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने बीजेपी की तीन दिन की रथ यात्रा को हरी झंडी दे दी है. बता दें कि इस यात्रा को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हरी झंडी दिखाने वाले हैं. कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि ये सुनिश्चित किया जाए कि इस दौरान लॉ एंड ऑर्डर में किसी तरह की कमी न आए.

जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती की सिंगल बेंच ने बीजेपी के वकील को 15 मिनट अपनी दलील रखने के लिए दिया था. वहीं, राज्य सरकार को 10 मिनट की दलील रखने के लिए कहा गया था. इस दौरान जज बीजेपी के वकील की दलीलों से संतुष्ट दिखे और उन्होंने रथयात्रा की अनुमति दे दी. बता दें कि रथयात्रा की अनुमति से इनकार करने के कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ के फैसले के खिलाफ बीजेपी ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील दाखिल की थी.

‘रथयात्रा’ रैलियों के आयोजन पर मांगी रिपोर्ट
अदालत ने पश्चिम बंगाल के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि भाजपा के सभी जिला अध्यक्षों का पक्ष सुनने के बाद पार्टी द्वारा निकाली जाने वाली ‘रथयात्रा’ रैलियों के आयोजन पर उसे 21 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा था. न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती ने नौ जनवरी को सुनवाई के अगले दिन तक रैली स्थगित करने का निर्देश देते हुए कहा कि रथयात्रा की अनुमति देने की भाजपा की अर्जी को इस स्तर पर मंजूर नहीं किया जा सकता.

बीजेपी ने कहा था कि निकालेगी रथयात्रा
दूसरी तरह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल में अपने ‘रथ यात्रा’ कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगी. पार्टी ने हालांकि कहा कि रथ यात्रा की शुरुआत राज्य सरकार द्वारा नई तिथियों पर स्थिति स्पष्ट करने के बाद होगी.कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक भाजपा ने गुरुवार को मुख्य सचिव मलय डे, गृह सचिव अत्री भट्टाचार्य और पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र के साथ बैठक की. लालबाजार पुलिस मुख्यालय में हुई बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, “हमने राज्य सरकार को सूचित कर दिया है कि हम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही अपने कार्यक्रम का आयोजन करना चाहते हैं. केवल तिथियों में परिवर्तन होगा.” घोष के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और वरिष्ठ नेता मुकल राय भी बैठक में मौजूद थे.

7 दिसंबर से शुरू होना था
“लोकतंत्र बचाओ” के तौर पर प्रचारित ‘रथ यात्रा’ कार्यक्रम कूचबिहार से सात दिसंबर को शुरू होना था, लेकिन इससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका को आधार बनाते हुए राज्य सरकार ने अनुमति देने से मना कर दिया था. घोष ने कहा, “राज्य सरकार की अनुमति मिलते ही कार्यक्रम शुरू हो जाएगा. सरकार के प्रतिनिधियों ने हमें सुना और कहा कि वह उचित समय पर हमें सूचित कर देंगे.”

इसके पहले भी हो चुका है ऐसा
बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा को राज्य में इस तरह की शिकायत को ले कर अदालत का रुख करना पड़ा है. भाजप ने अदालत में दावा किया कि उसने तीन रैलियों के लिए इजाजत मांगी थी, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला. भाजपा की योजना सात दिसंबर को उत्तर में कूचबिहार से, नौ दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप से, और 14 दिसंबर को बीरभूक के तारापीठ मंदिर से रैली निकालने की है. महाधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक या गृह सचिव रैलियों के लिए इजाजत देने वाले सक्षम प्राधिकार नहीं हैं और एक राजनीतिक पार्टी होने के नाते याचिकाकर्ता (भाजपा) को यह बात जाननी चाहिए.