नई दिल्ली: भारत एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए रूस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है. इस बीच अमेरिका ने अनौपचारिक तौर पर इंडिया से कहा है कि वह ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के तहत उसे छूट दे सकता है. अगर भारत उसे यह भरोसा दिलाए कि वह एफ -16 लड़ाकू विमान अमेरिका से ही खरीदेगा. हालांकि भारत ने अमेरिका को इस तरह का कोई आश्वासन देने से इंकार कर दिया है. पाकिस्तान के पास पहले से ही यह एयरक्राफ्ट मौजूद है. शायद यही वजह है कि भारत इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. सीएएटीएसए के तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को रूस के रक्षा या खुफिया प्रतिष्ठान के साथ महत्वपूर्ण लेन-देन में शामिल देशों और संस्था को दंडित करने का अधिकार है. Also Read - कॉल सेंटर घोटालेबाज: कनाडा में छात्रों को ठग रहा था भारतीय, कई और इसमें शामिल

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को सिंगापुर में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अमेरिका चाहता है कि भारत उससे एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदे. निर्मला सीतारमण दिसंबर में रक्षामंत्री के तौर पर अपनी पहली अमेरिकी यात्रा पर जाने वाली हैं. हालांकि यह तय नहीं है कि तब तक मैटिस ट्रम्प प्रशासन का हिस्सा रहेंगे या नहीं. मैटिस भारत के लिए सीएएटीएसए छूट के मुखर समर्थक हैं. उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के सामने भारत को इस कानून से छूट के लिए जोरदार बहस किया था. हालांकि छूट पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा किया जाना है, जिन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि रूस के साथ हथियार खरीदने के लिए भारत के साथ किस तरह पेश आना है वह देख लेंगे. Also Read - चीन को जवाब! मालाबार युद्धाभ्यास में अमेरिका और जापान के अलावा अब ऑस्ट्रेलिया भी होगा शामिल

वहीं अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी देश के लिए छूट नहीं दी जाएगी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत अगर छूट चाहता है तो उन्हें ट्रंप के साथ डील करनी होगी. हालांकि, अमेरिका ने भारत के सामने एफ-16 और एफ-18 दोनों के डील के लिए विकल्प रखे हैं. पाकिस्तान एफ-16 एयरक्राफ्ट तीन दशकों से इस्तेमाल कर रहा है और भारत को इन एयरक्राफ्ट में कोई भी दिलचस्पी नहीं है. अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान के पास जो एफ-16 एयरक्राफ्ट है, उससे कहीं ज्यादा बेहतर एफ-16 ब्लॉक 70 जबकि भारत का तर्क है एफ-16 हमारे ब्रह्मोस के अनुकूल नहीं है. Also Read - LAC Dispute: भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर बातचीत के लिए तैयार, 8वें दौर की वार्ता हो सकती है इस सप्ताह

हालांकि अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंधों को लेकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन संभावना जताई जा रही है कि रूस को पेमेंट करने के बाद सीएएटीएसए के तहत भारत पर प्रतिबंधों की दिशा में अमेरिका आगे बढ़ सकता है. उम्मीद है कि भारत इस वित्तीय वर्ष में एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए रूस को 4.5 अरब डॉलर का भुगतान कर सकता है. भारतीय वायुसेना ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के तहत 114 लड़ाकू विमान (सिंगल/डबल इंजन) खरीदने के लिए आरएफआई (सूचना के लिए अनुरोध) जारी किया है, जिसमें एफ -16 और एफ -18 शामिल हो सकते हैं. लेकिन अमेरिकी विमान खरीदने के बारे में दिल्ली से वाशिंगटन को कोई आश्वासन नहीं मिला है.