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भारत के उत्तरी राज्य झारखंड ने चुनावी बिगुल बज चुका है। यहाँ २५ नवंबर से ५ चरणो में चुनाव होने है। इस राज्य में सभी सियासी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एक और लालू और नितीश एक साथ है तो वहीँ दूसरी और कांग्रेस है जिसका मनोबल इन दिनों काफी डगमगाया हुआ है। इन सबके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी है जो २०१४ लोकसभा चुनावो के बाद बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास में है। इन सबके अलावा शिबू सोने भी इन चुनावो में मुख्या भूमिका निभा सकते है।

पहले बात आरजेडी-जेडीयू गठबंधन की Also Read - बिहार में मुफ्त वैक्सीन बांटने के वादे पर राहुल गांधी का बीजेपी पर हमला, RJD बोली- इसमें भी चुनावी सौदेबाजी, छी-छी

लोकसभा चुनावो के बाद मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को ख़त्म करने और सेक्युलर मतों को एक करने के लिए यह दोनों पार्टी एक साथ में आयी। इन दोनों पार्टीयो ने बिहार उप चुनावो में बीजेपी को पछाड़ा भी मग अब इन्ही के बीच सीटों के बटवारे को लेकर बहस हो रही है। ऐसा माना जारहा है की दोनों भी पार्टीया काम से काम ४ सीटों पर आमने सामने होगी। Also Read - Bihar Assembly Election: बिहार में कोरोना वैक्सीन मुफ्त बांटने के वादे से बवाल, बीजेपी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत

अब बात कांग्रेस की Also Read - भाजपा सरकार की न तो नीतियां सही हैं, नीयत, योगी राज में विकास का पहिया थम गया है : अखिलेश

पिछले साल से हार का मु देख रही कांग्रेस पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। पार्टी राज्य में जे.एम.एम के सहारे सत्ता में तो थी मगर यह गठबंधन टूटने की वजह से अलग थलग पड़ गयी है। हालांकि सचिन पायलट के वहा जाने से आपसे में बिखरी पार्टी एक तो होगई है मगर पार्टी यहाँ किसी करिश्मे के ही इंतज़ार में है।

मोदी की लहर में बीजेपी को जीत का आत्मविश्वास

भारत के सत्तारूढ़ दाल भारतीय जनता पार्टी पुरे उत्साह से चुनाव प्रचार में उत्तर गयी है। पार्टी को विश्वास है की अन्य राज्यों की तरह पार्टी यहाँ भी मोदी के डैम पर जीत हासिल करेगी। अमित शाह ने भी झारखंड में काफी मेहनत भी कर रहे है और उनका बखूभी साथ दे रहे है राम विलास पासवान।

इन सब के अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी पूरा डम ख़म लगा दिया है। हेमंत सोरेन यहाँ दुबारा से मुख्यमंत्री का ताज पहनने के लिए पूरी मेहनत कर  रहे है।

यह तो २३ दिसंबर को ही साफ़ होगा की झारखंड में जीत का सहारा किसके सर साझेगा मगर एक बात तो साफ़ है की इन चुनावो में तमाम पार्टीयो की प्रतिष्ठा डाव पर लगी है.