नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने निजामुद्दीन पश्चिम में इस महीने की शुरुआत में बड़ी धार्मिक सभा की अगुवाई करने वाले मौलाना के खिलाफ कोविड-19 संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कोई जनसभा आयोजित नहीं करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने संबंधी सरकारी आदेशों के उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया है. Also Read - क्या अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम की कोरोना से हुई मौत?, सोशल मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म

दिल्‍ली पुलिस के कमिश्‍नर ने कहा, तबलीगी जमात के मौलाना साद अन्‍य के खिलाफ महामारी अधिनियम 1897 और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत सरकारी आदेशों के उल्‍लंघन का मामला दर्ज किया गया है, जिसमें निजामुद्दीन की मरकज बस्‍ती प्रबंधन को भीड़ जमा होने से रोकने के लिए दिए गए थे. Also Read - Delhi Violence: दिल्ली दंगा मामले में अबतक सैकड़ों लोगों की हुई गिरफ्तारी, 78 चार्जशीट दाखिल

बता दें कि इंडोनेशिया और मलेशिया समेत अनेक देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने एक से 15 मार्च तक हजरत निजामुद्दीन में तबलीगी जमात में भाग लिया था. रविवार रात को मरकज में रह रहे कई लोगों में कोविड-19 के लक्षण नजर आने लगे थे और अर्द्धसैन्य अधिकारियों ने पूरे इलाके को सील कर दिया था लेकिन प्राधिकारियों को इस आयोजन के कारण वायरस के फैलने की आशंका है. Also Read - राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमितों का आंकड़ा 10128, अब तक मृतक संख्‍या 219

तेलंगाना सरकार ने सोमवार देर रात बताया कि इस सभा में भाग लेने वाले छह लोगों की संक्रमण के कारण मौत हो गई.

तमि‍लनाडु में संक्रमित पाए गए लोगों में से कम से कम 32 ऐसे भी हैं, जो दिल्ली के निजामुद्दीन (पश्चिम) स्थित मरकज के धार्मिक आयोजन में शामिल हुए थे. सरकार ने कहा कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले लोगों को ‘अलग’ करने की कोशिश की जा रही है. दिल्ली जाने वाले 1500 लोगों में से 1,331 वापस लौट चुके हैं. इनमें से 800 का पता लगाया गया है, जबकि 300 का पता अभी नहीं चला है और बाकी को पृथक कर दिया गया है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को बताया कि जमात में भाग लेने वाले 24 लोग संक्रमित पाए गए हैं और मरकज में रह रहे 440 से अधिक लोगों में बीमारी के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद के खिलाफ सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के मामले में महामारी रोग कानून और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

जमात के मुख्यालय मरकज निज़ामुद्दीन ने कहा है कि उसने कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है. उसने अपने परिसर में पृथक केंद्र स्थापित करने की भी पेशकश की है.

मरकज निज़ामुद्दीन ने ने कहा, जब जनता कर्फ्यू का ऐलान हुआ, तो बहुत सारे लोग मरकज में रह रहे थे. 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया तो उसी दिन मरकज बंद कर दिया गया. बाहर से किसी भी आदमी को नहीं आने दिया गया.