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तिरुवनंतपुरम, 23 नवंबर | पोप फ्रांसिस रविवार को वेटिकन सिटी में केरल (भारत) के दो धर्म गुरुओं को एक विशेष प्रार्थना सभा में संत घोषित करने जा रहे हैं, जिसे लेकर केरल के कैथोलिक समुदाय में जश्न का माहौल है। पोप ने इस साल अप्रैल में कुरिएकोस उर्फ चावरा और सिस्टर यूफ्रेसिआ उर्फ एवुप्रेसिम्मा को संत घोषित किए जाने की मंजूरी दी थी। Also Read - Kerala Couple Photoshoot Viral: इस कपल के बोल्ड फोटोशूट ने जंगल से लेकर सोशल मीडिया तक मचाई सनसनी, आप भी देखें रोमैंटिक तस्वीरें

रविवार को राज्य के कैथोलिक गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। केरल की 3.30 करोड़ की आबादी में 23 फीसदी लोग ईसाई हैं और उनमें से 50 फीसद कैथोलिक हैं। कुरिएकोस चावरा का जन्म 10 फरवरी, 1805 को अलप्पुझा के करीब हुआ था। वह 13 साल की उम्र में ही घर छोड़कर पादरी बनने का प्रशिक्षण लेने चले गए थे। Also Read - सरकार ने पहली बार माना, 'कुछ जिलों में हुआ कोरोना वायरस का सामुदायिक संक्रमण'

उन्हें 29 नवंबर, 1829 को विधिवत रूप से पादरी घोषित किया गया था। चावरा एक समाज सुधारक भी थे और महिलाओं का बौद्धिक विकास एवं उनको शिक्षित करना, संपूर्ण सामाजिक कल्याण की पहली सीढ़ी मानते थे। चावरा (65) का देहावसान तीन जनवरी, 1871 को हुआ था। वहीं, ‘मदर ऑफ कार्मेल’ समाज की सिस्टर यूफ्रेसिआ को 1900 में नन की उपाधि मिली थी।

यूक्रेसिआ का देहावसान 29 अगस्त, 1952 को हुआ था। उन्हें वर्ष 1987 में ‘सर्वेट ऑफ गॉड’ घोषित किया गया था और तीन दिसंबर 2006 में वह धन्य घोषित की गई थीं। वेटिकन में रविवार को आयोजित केनोनिजेशन (संतों की घोषणा) समारोह का गवाह बनने के लिए केरल कैथोलिक का एक प्रतिनिधिमंडल वेटिकन पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल में अन्य धर्मो की गणमान्य हस्तियां भी शामिल हैं।

केरल सरकार ने इस शुभ अवसर के लिए दो मंत्रियों को प्रतिनियुक्त किया है। राज्यसभा के उपाध्यक्ष पी.जे. कुरियन भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अगुवा हैं।