नई दिल्लीः केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में जांच का दायरा दुनियाभर में फैलाया है और उसने 40 देशों से बात करके एक वट्सएप ग्रुप में शामिल मोबाइल फोन मालिकों की जानकारी मांगी है. बताया जा रहा है कि इसी ग्रुप पर कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए थे. अधिकारियों ने यहां कहा कि एजेंसी ने इंटरपोल के जरिये इन देशों से बात की है. Also Read - देश में कोरोना के मामले 9 लाख के पार, एक दिन में आए 28,498 नए केस

बाल पोर्नोग्राफी ग्रुप में 234 सदस्य थे जिसमें 66 भारतीय, 56 पाकिस्तानी, 29 अमेरिकी और बाकी के 37 अन्य देशों के लोग शामिल थे. उन्होंने कहा कि एजेंसी ने इन देशों को इंटरपोल के जरिये पत्र भेजा है और इनमें से कुछ ने उपयोगकर्ताओं से संबंधित जानकारी साझा की है. सीबीआई ने 22 फरवरी को वट्सएप ग्रुप के जरिए संचालित एक अंतरराष्ट्रीय बाल पोर्नोग्राफी रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया था और उत्तर प्रदेश के कन्नौज से इसके कथिक मुख्य सदस्य निखिल वर्मा को गिरफ्तार किया था. Also Read - पूर्वी लद्दाख विवाद: भारत-चीन के आर्मी कमांडरों के बीच आज चुशुल में हाईलेविल मीटिंग

सीबीआई ने वर्मा के अलावा उसके चार साथियों दिल्ली के नफीस रजा और जाहिद, मुंबई के सत्येंद्र ओम प्रकाश चौहान और नोएडा के आदर्श के खिलाफ मामला दर्ज किया था. उन्होंने कहा कि सभी आरोपियों से इस संबंध में पूछताछ की गई है. जांच के दौरान, एजेंसी ने पाया कि इस ग्रुप में 119 सदस्य थे जो ये आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो प्राप्त कर रहे थे.

अधिकारियों ने कहा कि भारत, पाकिस्तान और अमेरिका के अलावा इस ग्रुप के सदस्य चीन, न्यूजीलैंड, मेक्सिको, अफगानिस्तान, ब्राजील, केन्या, नाइजीरिया और श्रीलंका के थे. उन्होंने कहा कि छानबीन के दौरान, सीबीआई ने मोबाइल फोन, लैपटाप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए जिन्हें विश्लेषण के लिए तिरूवनंतपुरम की सरकारी प्रयोगशाला में भेजा गया है.

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में भारत बड़ा बाजार
चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में भारत सबसे बड़े कंज्यूमर और डिस्ट्रिब्यूटर्स बन रहा है. यह बढ़ोतरी उस हालात में है जब देश में इंटरनेट पर इस तरह के मैटेरियल पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है.साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देश में हर 40 मिनट में एक गंदा वीडियो बनाया जाता है. इस तरह के कंटेंट को इंटरनेट पर अपलोड करने के मामले में केरल लिस्ट में टॉप पर है. वहीं, हरियाणा में मोबाइल पर सबसे ज्यादा इस तरह के कंटेंट देखे जाते हैं. चिंता की बात यह है कि इस तरह के जितने पोर्न वीडियो अपलोड किए जाते हैं, उनमें बच्चों और किशोरों के ज्यादा हैं.

देखने पर भी सजा का प्रवाधान
वरिष्ठ वकील और आई टी एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद CSAM के कंटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं. आईटी एक्ट के तहत इस तरह के कंटेंट देखने या शेयरिंग करने को लेकर सख्त सजा का प्रावधान है, लेकिन कानून को लागू करने में ढिलाई हो रही है. सरकार का जोर वेबसाइट्स को ब्लॉक करने को लेकर है लेकिन, कंटेंट के सोर्स को नहीं देखा जा रहा है.