नई दिल्ली: सीबीआई (CBI) के डायरेक्टर आलोक कुमार वर्मा को अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा. वहीं, सीबीआई ने इन खबरों से इंकार किया है कि राफेल डील से संबंधित फाइलें वर्मा के पास थीं. गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि सरकार ने आनन-फानन में अवैध तरीके से वर्मा को हटाया है ताकि राफेल मामले की जांच नहीं हो सके. हालांकि, भाजपा ने उनके आरोपों को झूठ करार दिया.

वहीं कांग्रेस ने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को बहाल करने की मांग को लेकर शुक्रवार को देशभर में सीबीआई दफ्तरों के बाहर धरना प्रदर्शन करने का एलान किया है. इसके संबंध में राहुल गांधी ने कहा कि वह सीबीआई मुख्यालय के बाहर पार्टी के प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे.

वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ वर्मा की याचिका पर सुनवाई करेगी.

एक गैर सरकारी संगठन ‘कामन कॉज’ ने भी गुरुवार को याचिका दायर कर जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की. वर्मा ने अपनी याचिका बुधवार को दायर की थी. उनकी याचिका पर सुनवाई गैर सरकारी संगठन की याचिका के साथ ही होगी.

जांच एजेंसी के निदेशक ने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि एजेंसी के प्रमुख और विशेष निदेशक को छुट्टी पर भेजने के अलावा संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों को भी बदल दिया गया है. न्यायालय में वर्मा का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बुधवार को तत्काल सुनवाई की मांग की और उल्लेख किया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सुबह छह बजे वर्मा के अधिकार वापस लेने का फैसला किया.

इधर सीबीआई ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज किया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे समेत कई महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित फाइलें एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा के विचाराधीन थी. विवाद के केन्द्र में आए वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंगलवार देर रात आदेश जारी कर अवकाश पर भेज दिया था. प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात में आदेश जारी कर एजेंसी के निदेशक का प्रभार संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को सौंप दिया था.

गुरुवार को एक खबर में दावा किया गया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे से संबंधित एक फाइल समेत कई महत्वपूर्ण फाइलें उस समय वर्मा के विचाराधीन थी, जब उनकी शक्तियों को वापस लिया गया था. सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने एक बयान में इस खबर को झूठा बताया है. उन्होंने कहा,‘‘ये बातें निहित स्वार्थों द्वारा गढ़ी जा रही हैं और सीबीआई में हर स्तर पर प्रत्येक फाइल का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है.’’

वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी ने इस सौदे में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में चार अक्टूबर को वर्मा को एक विस्तृत शिकायत दी थी. भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दी गई इस ‘‘विस्तृत’’ शिकायत में भूषण और शौरी ने उनके दावे को पुख्ता करने के लिए दस्तावेज भी सौंपे थे.

(एजेंसी इनपुट के साथ)