चेन्नई। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंती नटराजन के चेन्नई स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की. उन पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप है. सीबीआई ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 120बी के तहत एफआईआर दर्ज किया है. इसके अलावा सीबीआइ ने इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग लिमिटेड एवं अन्य के खिलाफ सेक्सन 120बी पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. यूपीए सरकार के दौरान पर्यावरण मंत्री रही जयंती नटराजन ने जनवरी 2015 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.

मामला 2012 में वन संरक्षण अधिनियम का कथित रूप से उल्लंघन करते हुए खनन कंपनी इलेक्ट्रोस्टील को झारखंड के सिंहभूम जिले के सारंदा वन के वन भूमि की स्थिति बदलने के लिए मंजूरी देने से संबंधित है. केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री ने मंजूरी खारिज कर दी थी लेकिन जयंती ने पद संभालने के बाद कथित रूप से उसे मंजूरी दे दी.

सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया, ‘‘तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री जयंती नटराजन ने ईसीएल को गैर वन्य इस्तेमाल के लिए 55.79 हेक्टेयर वन भूमि की स्थिति बदलने के लिए मंजूरी दी, जबकि उनके पूर्ववर्ती राज्य मंत्री ने मंजूरी खारिज कर दी थी और इसके बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव ना होने के बावजूद मंजूरी दी गयी.’’ एजेंसी ने कहा कि वन महानिदेशक के सुझाव और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन किए बिना मंजूरी दी गयी.

कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद नटराजन ने उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए थे. नटराजन ने सोनिया गांधी को एक ख़त लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा है कि पर्यावरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी न देने के लिए उन पर राहुल गांधी की ओर से दबाव था. उन्होंने लिखा कि उनके इस्तीफ़ा देने के बाद राहुल गांधी के दफ़्तर की ओर से उनके खिलाफ मीडिया में प्रचार किया गया.

गौरतलब है कि जयंती नटराजन पर 35 ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी नहीं देने का आरोप है, जो हजार से पांच हजार करोड़ तक के हैं. उल्लेखनीय है कि जयंती नटराजन को राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए थे, लेकिन नरसिम्हा राव के समय में जयंती पार्टी छोड़कर जीके मूपनार के नेतृत्व में बनी तमिल मनिला कांग्रेस में शामिल हुई थीं, फिर वापस सोनिया गांधी उन्हें पार्टी में लेकर आई थीं.