नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ तीन करोड़ रुपए रिश्वत लेने के आरोप में केस दर्ज किया है. आरोप है कि मीट कारोबारी मोइन कुरैशी की जांच से जुड़े मामले में व्यापारी सतीश साना के मामले को खत्म करने के लिए उन्होंने तीन करोड़ रुपए लिए. सीबीआई ने सतीश साना की शिकायत के आधार पर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद, कथित बिचौलिए सोमेश प्रसाद और अन्य अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है. Also Read - अनुराग कश्यप की मुश्किलें बढ़ीं, पायल घोष ने रेप के लिए दर्ज कराई FIR

सीबीआई ने किया बचाव
हालांकि सीबीआई ने अपने निदेशक आलोक वर्मा का विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के आरोपों से बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ‘मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण’ हैं. सीबीआई ने अस्थाना ने खिलाफ रिश्वत का मामला दर्ज किया है. अस्थाना ने कैबिनेट सचिव और केन्द्रीय सतर्कता आयोग को पत्र लिख कर सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता के कम से कम 10 मामलों का जिक्र किया था. Also Read - Bigg Boss 14: F.I.R की कविता कौशिक को है मां बनने से ऐतराज़, अब बिग बॉस में करेंगी धांसू एंट्री

सीबीआई के प्रवक्ता ने देर रात जारी एक बयान में कहा कि सतीश साना के खिलाफ एलओसी जारी होने की जानकारी सीबीआई के निदेशक को नहीं थी, जैसे आरोप सही नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘डीसीबीआई ने 21 मई 2018 को एलओसी जारी करने के प्रस्ताव को देखा और उसे ठीक भी किया था. उन्होंने कहा कि आरोप कि सीबीआई के निदेशक ने साना की गिरफ्तारी को रोकने का प्रयास किया था, पूरी तरह से झूठ और दुर्भावनापूर्ण है. Also Read - अनुराग कश्यप के खिलाफ दर्ज नहीं हो पाई FIR, लंबे इंतजार के बाद थाने से वापस लौटीं पायल घोष

वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के 10 मामले
गुजरात संवर्ग के आईपीएस अधिकारी अस्थाना उस विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे हैं जो अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले और उद्योगपति विजय माल्या द्वारा की गयी कर्ज धोखाधड़ी जैसे अहम मामलों को देख रहा है. यह दल मोईन कुरैशी मामले की भी जांच कर रहा है. सरकारी सूत्रों के अनुसार अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को एक विस्तृत पत्र लिखकर वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के 10 मामले गिनाए थे.

इसी पत्र में यह भी आरोप लगाया गया था कि साना ने इस मामले में क्लीनिचट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो करोड़ रुपये दिए. सूत्रों के अनुसार यह शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भेजी गई जो इस मामले की जांच कर रहा है. अस्थाना ने प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को फिर लिखा कि वह साना को गिरफ्तार और पूछताछ करना चाहते हैं और इस संबंध में 20 सितंबर 2018 को निदेशक को एक प्रस्ताव भेजा गया था.

किसने खोला साना के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर
अपने पत्र में उन्होंने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखी अपनी चिट्ठी का भी हवाला दिया जिसमें निदेशक के खिलाफ कथित अनियमितताओं का ब्योरा दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि निदेशक ने करीब चार दिनों तक फाईल कथित रूप से रखी और 24 सितंबर, 2018 को उसे अभियोजन निदेशक (डीओपी) के पास भेजने का निर्देश दिया. अभियोजन निदेशक ने रिकार्ड में मौजूद सभी सबूत मांगे. सूत्रों के अनुसार अस्थाना की अगुवाई वाली टीम ने ही साना के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर खोला जिसने देश से भागने की कोशिश की लेकिन सक्रिय कार्रवाई की वजह से वह नहीं भाग सका.

इन अधिकारियों पर भी मामला दर्ज
सूत्रों के मुताबिक अस्थाना ने कहा है यह फाइल डीओपी द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर के साथ फिर तीन अक्टूबर को सीबीआई निदेशक के समक्ष फिर रखी गयी लेकिन अबतक यह नहीं लौटी है. सूत्रों ने अस्थाना की बातों का हवाला देते हुए कहा कि साना से एक अक्टूबर, 2018 को पूछताछ की गई थी, पूछताछ के दौरान साना ने बताया कि वह एक नेता से मिला जिसने वर्मा से मुलाकात करने के बाद उसे आश्वासन दिया कि इस मामले में उसे क्लीनचिट दे दी जाएगी.

अस्थाना के अलावा एजेंसी ने पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र कुमार और मनोज प्रसाद, कथित बिचौलिये सोमेश प्रसाद और अन्य अज्ञात अधिकारियों पर भी मामला दर्ज किया है. उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात, 13(2) और 13 (1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात-ए भी लगाई गई है. सीबीआई ने सूचित किया कि इन धाराओं में किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नहीं होती.

(इनपुट भाषा)