श्रीनगर/जम्मू: केंद्रीय  जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित बंदूक लाइसेंस रैकेट से संबंधित दो मामलों में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों यश मुदगल और कुमार राजीव रंजन के परिसरों समेत नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और तीन राज्यों में 17 स्थानों पर सोमवार को छापे मारे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. राजस्थान पुलिस ने इस रैकेट का 2017 में खुलासा किया था. ऐसा आरोप है कि तत्कालीन सरकारी अधिकारियों ने जम्मू कश्मीर के अनिवासियों को नियमों का उल्लंघन करते हुए लाइसेंस जारी करने के बदले में रिश्वत ली.

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर पुनर्गठन के बाद एजेंसी का वहां यह पहला बड़ा अभियान है. केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही सीबीआई को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत वहां काम करने का अधिकार मिल गया है. सरकार ने पांच अगस्त को पूर्व जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों.. जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था.

1, 43,013 से 1,32,321 लाइसेंस बाहरियों के जारी हुए थे
एटीएस अधिकारियों के अनुसार जम्मू क्षेत्र के डोडा, रामबन और उधमपुर जिलों में 1,43,013 लाइसेंसों में से 1,32,321 लाइसेंस राज्य के बाहर रहने वाले लोगों को जारी किए गए. राज्य में रहने वाले लोगों को केवल 10 प्रतिशत यानी 4,29,301 लाइसेंस जारी किए गए.

कश्मीर में तीन स्थानों, जम्मू में 11 स्थानों समेत गुरुग्राम, नोएडा समेत 17 जगह छापे
सीबीआई अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कश्मीर में तीन स्थानों, जम्मू में 11 स्थानों और गुरुग्राम (हरियाणा), मोहाली (पंजाब) और नोएडा (उत्तर प्रदेश) में एक-एक स्थान पर की गई छापेमारी के दौरान बैंक विवरणों समेत मामलों से संबंधित कई दस्तावेज बरामद किए गए.

आईएएस अधिकारियों समेत कई अफसरों के परिसरों में छापेमारी
2007 बैच के आईएएस अधिकारी मुदगल और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रंजन के परिसरों के अलावा इतरत हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद जुनैद खान, एफसी भगत, फारूक अहमद खान और जहांगीर अहमद मीर के आवासों पर छापेमारी की गई. मुदगल इस समय बिजली वितरण निगम जम्मू, के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक हैं, जबकि रंजन जम्मू श्रीनगर मेट्रो रेल निगम के सीईओ हैं. सीबीआई को पिछले वर्ष अगस्त में यह मामला सौंपा गया था.

उपायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों के परिसरों की तलाशी
जम्मू कश्मीर के अलग-अलग जिलों से करीब दो लाख हथियार लाइसेंस जारी करने में अनियमितताओं से संबंधित सीबीआई के दो मामलों की जांच के सिलसिले में कुपवाड़ा, बारामूला, उधमपुर, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी, डोडा, पुलवामा के तत्कालीन उपायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों के परिसरों की तलाशी ली गई है.

मामले की गंभीरता का अंदाजा नहीं था
ऐसा आरोप है कि तत्कालीन सरकारी अधिकारियों ने जम्मू कश्मीर के अनिवासियों को नियमों का उल्लंघन करते हुए लाइसेंस जारी करने के बदले में रिश्वत ली. राजस्थान एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि जब ‘जुबैदा’ कोड नाम से इस ऑपरेशन की शुरूआत की गई तो उन्हें इस मामले की गंभीरता का अंदाजा नहीं था.

एटीएस ने किया था पर्दाफाश, सीबीआई को सौंपा था मामला
आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा इस मामले में एक गिरोह का पर्दाफाश किए जाने के बाद राजस्थान के पुलिस महानिदेशक ओपी गल्होत्रा की सिफारिश पर सीबीआई को यह मामला सौंपा गया था. एजेंसी ने जम्मू कश्मीर सरकार की सहमति से इस संबंध में दो प्राथमिकियां दर्ज की थीं. इसमें कुपवाड़ा के तत्कालीन उपायुक्त को नामजद किया गया जबकि विभिन्न जिलों के अज्ञात अधिकारियों को अन्य आरोपी नामजद किया गया.

तत्कालीन मुख्य सचिव को संबोधित कई पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला
सीबीआई की चंडीगढ़ इकाई ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के अलावा रणबीर दंड संहिता और हथियार कानून की धारा 3/25 के उल्लंघन के लिए आपराधिक कदाचार और आपराधिक षड़यंत्र के लिए प्राथमिकियां दर्ज कीं. राजस्थान पुलिस अधिकारियों के अनुसार जम्मू कश्मीर सरकार को 2017 में रैकेट के बारे में सूचित किया गया था और तत्कालीन मुख्य सचिव बी बी व्यास को संबोधित कई पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला.