नई दिल्ली. भगौड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को लेकर इस समय सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने तो इस मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली को ही सीधे-सीधे घेरने की कोशिश की है. इस बीच इकॉनमिक टाइ्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने नए सिरे से एक जांच शुरू की है जिसका इरादा माल्या के खिलाफ नई चार्जशीट दाखिल करना है. इसमें यूपीए सरकार के दौरान सार्वजनिक बैंकों से किंगफिशर एयरलाइन को दिए गए लोन में वित्त मंत्रालय कार्यालय के अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच होगी.

इकॉनमिक टाइम्स ने अपने विश्वस्त सूत्रों से जानकारी हासिल की है कि सीबीआई ने पहले से ही आधाकारिक तौर पर वित्त मंत्रालय को अप्रोच किया है और केस को बनाने के लिए जरूरी कागजात को जुटाने की कोशिश की है. सूत्रों के अनुसार, इन फाइलों के आधार पर ही आगे अधिकारियों से पूछताछ करने का खाका तैयार किया जाएगा.

अधिकारियों पर खड़े हुए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान वहां तैनात कुछ अन्य अधिकारियों पर पहले से ही सवाल खड़े हो चुके हैं. सूत्रों के अनुसार, ये प्रारंभिक जांच है, जिसका डाइमेंशन जांच के साथ बढ़ता जाएगा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है विजय माल्या के घर से हुए पत्र व्यवहार और दूसरे ईमेल एक्सचेंज. बताया जा रहा है कि इसमें ज्यादातर ईमेल माल्या और उसकी प्रमुख कंपनी के एडवाइजर एके रवि, हरिश भट्ट और ए रघुनाथ के बीचे हैं.

एक लाख से ज्यादा ईमेल
बताया जा रहा है कि सीबीआई ने साल 2008 से 2013 के बीच हुए एक लाख से ज्यादा इंटरनल ईमेल को सीज किया है. एक अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इसमें पीएमओ, वित्त मंत्रालय, उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलिय मंत्रालय से हुई बातचीत के डॉक्यूमेंट भी शामिल हैं. इसके केंद्र में बैंक लोन और क्रेडिट पर एयरक्राफ्ट टरबाइन फ्यूल का सप्लाई है.

संयुक्त सचिव की भूमिका!
रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी मुख्य रूप से संयुक्त सचिव (बैंकिंग) अमिताभ वर्मा की भूमिका की जांच कर रही है. वर्मा से जुड़े कई संदर्भों में एजेंसी का ध्यान माल्या के रवि नेदुंगड़ी को भेजे ईमेल पर गया. 26 मार्च 2009 को भेजे गए इस ईमेल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 500 करोड़ रुपये अदायगी की बात है.

राजनैतिक एंगल
सीबीआई ईमेल से जुड़ रहे उस दावे की भी जांच कर रहा है कि इस मामले में राजनीतिक भूमिका भी है और कुछ मंत्रियों ने मदद की है. अब तक माल्या के खिलाफ जो केस चल रहा है वह लोन न चुकता करने के इर्द-गिर्द है, जो कि उसके देश से भाग जाने के बाद फ्रॉड की श्रेणी में बदल गया है. बता दें कि माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर सीबीआई पहले ही यूके के कोर्ट में पहुंच चुकी है.