नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में सीबीआई बनाम कोलकाता पुलिस विवाद के बीच जांच एजेंसी सीबीआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाए कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की और एजेंसी को ऐसे दस्तावेज सौंपे, जिनमें से कुछ में छेड़छाड़ की गई थी. सारदा चिटफंड घोटाले में कुमार एसआईटी जांच का नेतृत्व कर रहे थे. वहीं, पश्चिम बंगाल पुलिस की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनुसिंघवी ने कुमार के खिलाफ आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि साक्ष्यों को नष्ट नहीं किया गया जैसा कि सीबीआई पांच वर्ष की जांच के बाद दावा कर रही है.

जांच में सहयोग नहीं कर रहे पुलिस कमिश्नर
सीबीआई ने आरोप लगाए कि उन्होंने और जिस विशेष जांच दल (एसआईटी) का उन्होंने नेतृत्व किया उसने जानबूझकर साक्ष्यों को नष्ट किया. अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल और सोलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चिटफंड घोटाले की जांच में कुमार सहयोग नहीं कर रहे हैं और एसआईटी ने संपूर्ण कॉल ब्यौरा नहीं दिया. मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी.

कॉल रिकॉर्ड की छेड़छाड़ वाली प्रति हमें मिली 
अटॉर्नी जनरल ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता तथा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को बताया, ”हमें जो दिया गया वह कॉल रिकॉर्ड की छेड़छाड़ वाली प्रति थी.”

कॉल डेटा को भी मिटा दिया गया
सीबीआई ने आरोप लगाए कि सारदा और रोज वैली पोंजी स्कीम के अध्यक्ष सुदीप्ता सेन से बरामद लैपटॉप और फोन फोरेंसिक प्रयोगशाला को नहीं भेजे गए.ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सेन से जम्मू-कश्मीर से बरामद किए गए थे, जिन्हें लंबे समय से फरार रहने के बाद वहां से गिरफ्तार किया गया था. एजेंसी ने आरोप लगाए कि कॉल डेटा को भी मिटा दिया गया और यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि किसने किसे फोन किया.

पुलिस के वकील सिंघवी ने आरोपों से किया इनकार
बहरहाल, कुमार के खिलाफ आरोपों से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनुसिंघवी ने इंकार किया, जो पश्चिम बंगाल पुलिस की तरफ से पेश हुए. उन्होंने कहा कि साक्ष्यों को नष्ट नहीं किया गया जैसा कि सीबीआई पांच वर्ष की जांच के बाद दावा कर रही है. सिंघवी ने कहा, पांच वर्षों के बाद साक्ष्यों को कहां नष्ट किया गया. पांच वर्ष बाद भी साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 201 के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है.