केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बड़ा बदलाव करते हुए 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए तीन भाषाएं जरूरी कर दी हैं. नए नियम के अनुसार, इनमें से दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी रहेगा. यह व्यवस्था जुलाई, 2026 से लागू की जाएगी. बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि भाषा की पढ़ाई अब NCERT के नए पाठ्यक्रम के अनुसार होगी. इस फैसले को नई शिक्षा नीति के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद छात्रों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से ज्यादा जोड़ना है.
CBSE ने छात्रों को विदेशी भाषा पढ़ने की छूट भी दी है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं. छात्र फ्रेंच, जर्मन या दूसरी विदेशी भाषाएं चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें केवल तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही रखा जा सकेगा. यानी मुख्य भाषा के तौर पर भारतीय भाषाओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी. बोर्ड ने स्कूलों को यह आजादी दी है कि वे अपनी सुविधाओं और उपलब्ध शिक्षकों के हिसाब से भाषाएं तय कर सकते हैं, लेकिन दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी.
CBSE ने स्कूलों को 31 मई 2026 तक तीसरी भाषा तय करने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, कई स्कूलों को भाषा शिक्षकों की कमी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए बोर्ड ने कुछ वैकल्पिक उपाय भी सुझाए हैं. स्कूल जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन और हाइब्रिड क्लास चला सकते हैं. इसके अलावा, रिटायर्ड शिक्षकों और भाषा जानने वाले PG छात्रों की मदद लेने का सुझाव भी दिया गया है. CBSE का कहना है कि किसी भी हालत में नई व्यवस्था को समय पर लागू किया जाएगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो.
बोर्ड ने स्कूलों से साफ कहा है कि वे क्षेत्रीय कहानियां, कविताएं और स्थानीय पढ़ने की सामग्री को पढ़ाई का हिस्सा बनाएं. इसका मकसद छात्रों को अपनी जड़ों और भारतीय भाषाओं से जोड़ना है. फिलहाल, स्कूलों को अस्थायी तौर पर कक्षा 6 की R3 किताबें 9वीं में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. इससे छात्रों को नई भाषा व्यवस्था को समझने में आसानी होगी.
CBSE ने ये भी साफ किया है कि तीसरी भाषा का कोई अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा. इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर इंटरनल तरीके से किया जाएगा. हालांकि, छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र उनके प्रमाणपत्र में जरूर किया जाएगा. बोर्ड ने यह भी कहा है कि तीसरी भाषा की वजह से किसी भी छात्र को 10वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा. इसके अलावा विशेष जरूरत वाले छात्रों और विदेश से लौटने वाले विद्यार्थियों को नियमों में राहत भी दी जाएगी.
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