चेन्नई: अपोलो अस्पताल ने दिवंगत जयललिता की मौत की जांच कर रहे जस्टिस ए अरूमुगास्वामी जांच आयोग  से कहा है कि पुलिस के एक बड़े अफसर के निर्देश के आधार पर परिसर के भीतर तत्कालीन  मुख्यमंत्री की आवाजाही के दौरान गलियारे का सीसीटीवी कैमरा बंद कर दिया गया था. बता दें कि जयललिता को  22 सितम्बर 2015 को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 5 दिसंंबर  2016 को उनका निधन हो गया था. तमिलनाडु सरकार ने सितंंबर 2017 में जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत पैनल का गठन किया था. Also Read - रजनीकांत की तबीयत अचानक हुई खराब, हैदाराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में हुए भर्ती

Also Read - Vikas Dubey Encounter Case: SC ने जांच आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ याचिका खारिज की

जयललिता की मृत्यु जांच मामले में एक सदस्यीय पैनल ने शुरू की सुनवाई Also Read - प्‍लास्‍ट‍िक बैग में थूककर घरों में फेंकते हुए महिलाएं CCTV में कैद, और बढ़ा कोरोना का खौफ

कानूनी प्रबंधक एस.एम. मोहन कुमार ने अस्पताल की ओर से एक हलफनामे में जस्टिस ए अरूमुगास्वामी जांच आयोग को अवगत कराया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने वाले चलन को देखते हुए अस्पताल में उपचार कक्ष, आईसीयू या सीसीयू में सीसीटीवी कैमरा नहीं है.

जयललिता की मौत की जांच कर रहे आयोग ने एम्स के तीन डॉक्टरों को समन किया

अस्पताल का पक्ष रखने वाली वकील मैमूना बादशा ने शुक्रवार को सौंपे हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर गलियारें और प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था.

वजन कम करने के लिए सर्जरी के खिलाफ थीं जयललिता, डाइटिंग कर कम करना चाहती थीं वजन

सीसीटीवी कैमरा और अस्पताल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के संबंध में आयोग के दो सवालों के जवाब में हलफनामा दाखिल किया गया है. उन्होंने कहा, ”अस्पताल के भीतर डायग्नोस्टिक परीक्षण जैसे स्कैन के लिए दिवंगत मुख्यमंत्री को जब भी कमरे से बाहर ले जाया गया, उस समय उस रास्ते के कैमरा को स्विच ऑफ कर दिया गया था.” उन्होंने कहा कि पुलिस महानिरीक्षक (खुफिया) के एन सत्यमूर्ति सहित पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर ऐसा किया गया था.

जन्मदिन विशेष: ऐसा था जयललिता का फिल्म से लेकर राजनीति तक का सफर