नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का एक साथ चुनाव बहुत जल्द नहीं होने वाले है. उन्होंने कहा कि यह तब तक संभव नहीं हो सकता है जब तक कि सभी राजनीतिक दल एक साथ बैठकर आम सहमति नहीं बना लेते हैं.

अरोड़ा ने निरमा विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि 1967 में एक ही समय में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का चुनाव हुए थे. 1967 के बाद कई अन्य कारणों के चलते इस व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो गए थे. उन्होंने एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर आगे कहा कि हम लोग इसे तब्बजों देंगे, लेकिन इस पर अभी काफी काम करना बाकी है. एक पूर्ण प्रक्रिया तैयार होने के बाद ही एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि हालांकि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एक साथ बैठकर आम सहमति बनाएं और कानून में संशोधन करें, ताकि एक साथ चुनाव करा जा सकें. जब तक यह व्यव्स्था नहीं किया जाता है तब तक सेमिनारों में बातचीत करने के लिए यह एक अच्छा विषय है. लेकिन यह बहुत जल्द नहीं हो रहा है.

सीईसी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन (वीवीपीएटी) पर संदेह करने पर नाखुशी जाहिर किया. उन्होंने कहा कि भरोसा दिलाना चाहूंगा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है. वो भी एक मशीन है जिसमें दूसरे समान की तरह खराबी तो आ सकती है लेकिन इसके साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश न के बराबर है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने चुनाव आयोग के लिए ईवीएम और वीवीपीएटी पर काम किया है. लेकिन इसके बावजूद इसको लेकर संदेह जताने पर बहुत दुखी और पीड़ा महसूस होती है.

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अलग-अलग मतदान के बारे में बोलते हुए उन्होंने ने कहा कि चुनाव के समय अक्सर देखा जाता है कि समृद्धि लोगों के बजाय कमजोर और गरीब वर्ग के लोग मतदान करने में ज्यादा सक्रिय होते हैं. जबकि यह एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें सभी की मतदान का महत्व है.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूर्व सीईसी टी एन शेषण की याद में इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में चुनाव अध्ययन पर एक चेयर स्थापित करने की घोषणा की. बता दें शेषण का 10 नवंबर को निधन हो गया था. वे 1990 से लेकर 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे.