बेंगलुरू: केंद्र सरकार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को बताया कि 1871 में हुई पहली जनगणना के समय से ही लिंगायत समुदाय के लोगों को हिंदू माना जाता रहा है. केंद्र के इस कथन के बाद उच्च न्यायालय ने उन अर्जियों का निपटारा कर दिया, जिसमें लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने की एक समिति की सिफारिशों को चुनौती दी गई थी.

मुख्य न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एस. सुजाता की खंडपीठ ने अर्जियों का निपटारा करते हुए कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इस बाबत कर्नाटक सरकार को लिखे गए केंद्र के पत्र की प्रति सौंप दी है और अब इन अर्जियों पर विचार की कोई जरूरत नहीं है. कर्नाटक सरकार ने केंद्र को 23 मार्च को लिखा था कि लिंगायत समुदाय को अलग धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए.

हिंदू धर्म से अलग होना चाहता है कर्नाटक का लिंगायत संप्रदाय, जानें क्या है वजह?

राज्य सरकार ने अपने इस पत्र के साथ समिति की सिफारिशों की प्रति भी दी थी. लेकिन केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार को 15 नवंबर को पत्र लिखकर कहा था कि लिंगायत समुदाय को 1871 की जनगणना के समय से ही हिंदू माना जाता रहा है.