नई दिल्ली: केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकारों को नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को लागू करने से इनकार करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह कानून संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची के तहत बनाया गया है.

केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी का यह बयान तब आया है, जब पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की कि यह कानून असंवैधानक है और उनके संबंधित राज्यों में इसके लिए कोई जगह नहीं है. इसमें महाराष्‍ट्र की शिवसेना सरकार में शामिल मंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष बालासाहेब थोरात ने भी अपने शीर्ष नेतृत्‍व के रुख का अनुशरण करने की बात कही है.

गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी ने कहा, राज्यों को ऐसे किसी भी केंद्रीय कानून को लागू करने से इनकार करने का अधिकार नहीं है जो संघ सूची में है. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को बुधवार को राज्यसभा ने पारित किया, इससे पहले सोमवार को इसे लोकसभा ने पारित किया था.

बता दें कि अधिनियम के मुताबिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. अधिनियम में कहा गया है इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल भारत में निवास करने के बाद भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जबकि पहले इसके लिए 11 साल निवास करने की जरूरत थी.