श्रीनगर. केंद्र सरकार ने मुहम्मद यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया. उस पर आरोप है कि वह आतंकवाद और अलगाववाद को प्रोत्साहन देता है. गृह सचिव राजीव गॉबा ने कहा कि आतंकवाद के गंभीर आरोप के मद्देनजर सरकार ने जेकेएलएफ (यासीन मलिक गुट) पर प्रतिबंध लगा दिया. उसे गैरकानूनी गतिविधियां निवारक अधिनियम के तहत गैरकानूनी घोषित किया गया है. इस संगठन के बारे में कहा जाता है कि वह जम्मू एवं कश्मीर की ‘आजादी’ का समर्थन करता है. मलिक वर्तमान में जम्मू के कोट बलवाल जेल में हिरासत में है.

गॉबा ने मीडिया से कहा, “जेकेएलएफ ने कश्मीर में अलगाव की विचाराधारा को बढ़ावा दिया और संगठन 1988 से अलगाववादी गतिविधियों व हिंसा को प्रोत्साहन दे रहा है.” गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है, “कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों को निकालने का यासीन मलिक मास्टरमाइंड रहा है और उनके संहार के लिए जिम्मेदार है.” जेकेएलएफ को भारतीय वायुसेना के चार अफसरों की हत्या का इलजाम लगता रहा है. साथ ही उस पर तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप लगा था. इससे पहले केंद्र ने जम्मू एवं कश्मीर की जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था.

हमारी सहयोगी वेबसाइट जीन्यूज के मुताबिक, अलगाववादी अभियानों का समर्थक यासीन मलिक और उसके संगठन के खिलाफ सरकार की यह कार्रवाई घाटी में महीनेभर के अंदर दूसरी कार्रवाई है. जेकेएलएफ जम्मू-कश्मीर में दूसरा संगठन है जिसे इस महीने प्रतिबंधित किया गया है. इससे पहले, केंद्र ने जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर प्रतिबंध लगा दिया था. गृह सचिव राजीव गॉबा ने शुक्रवार को बताया कि मलिक के संगठन जेकेएलएफ के खिलाफ जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने 37 एफआईआर दर्ज कर रखी है. इसके अलावा दो मामले भारतीय वायुसेना के कर्मियों की हत्या से भी जुड़े हैं, जिसकी एफआईआर CBI ने दर्ज की थी. वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने भी उसके खिलाफ केस दायर किया है, जिसकी अभी जांच चल रही है.