क्या देश में तेजी से खत्म हो रहा पीने का पानी? केन्द्र सरकार ने संसद में किया बड़ा खुलासा, चौंका देगी ग्राउंड वाटर से जुड़ी ये रिपोर्ट

केन्द्र सरकार द्वारा संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 730 इलाकों में भूजल का जरूरत से ज्यादा दोहन हो रहा है. कुछ जगह के पानी तो हैं लेकिन अब वे पीने लायक नहीं रह गए हैं. सरकार ने कहा कि वे ग्राउंड वाटर को बचाने के लिए जल शक्ति और अटल भूजल जैसी योजनाओं से बचाव की कोशिश कर रही है.

Published date india.com Published: December 21, 2025 12:49 PM IST
Ground Water Conditions in India
भारत में पीने के पानी की स्थिति क्या है? केन्द्र सरकार ने संसद में बताया

संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर को अनिश्चितकालीन सत्र के लिए स्थगित कर दिया गया है. इस सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बैठक की है. इस दौरान सरकार की ओर से संसद में ग्राउंड वाटर से जुड़ी एक रिपोर्ट भी रखी गई. संसद में केंद्र सरकार ने देश के भूजल (Groundwater) को लेकर जो आंकड़े पेश किए हैं, वे हमारी आंखें खोलने के लिए काफी हैं. यह रिपोर्ट बताती है कि हम जिस रफ्तार से जमीन से पानी खींच रहे हैं, उस हिसाब से आने वाले समय में नल से पानी आना महज एक सपना बन सकता है.

देश में ग्राउंड वाटर की क्या स्थिति?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी भूजल क्षमता का करीब 61 प्रतिशत हिस्सा हर साल इस्तेमाल कर रहा है. देश में हर साल बारिश और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से करीब 448 अरब घन मीटर पानी जमीन के नीचे जमा होता है, लेकिन इस्तेमाल के लिए उपलब्ध पानी केवल 407 अरब घन मीटर ही माना जाता है. इस रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि साल 2025 में ही देश ने 247 अरब घन मीटर पानी जमीन के सीने से निकाल लिया. हालांकि औसत आंकड़ा सुरक्षित दिखता है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर हालात बेहद डरावने हैं.

संसद में सरकार ने क्या बताया?

केंद्र सरकार ने संसद में खुलासा किया कि देश के कुल 6,762  ब्लॉक या तहसील में से 730 इलाके ऐसे हैं, जहां जमीन में जितना पानी भरता है, उससे कहीं ज्यादा निकाला जा रहा है. इन्हें अत्यधिक दोहन (Over-exploited) वाली श्रेणी में रखा गया है. इसके अलावा 201 इलाके गंभीर और 758 इलाके चेतावनी की सीमा पर हैं.

सरकार द्वारा जारी डेटा यह भी बताता है कि भले ही 73% इलाके सुरक्षित कहे जा रहे हों, लेकिन वहां का पानी अब सेहत के लिए हानिकारक बनता जा रहा है. कई राज्यों में भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट जैसे जहरीले तत्व पाए गए हैं, यानी पानी तो है, लेकिन वह पीने लायक नहीं रह गया है. यह जहर हड्डियों को गलाने और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.

पीने का पानी बचाने को लेकर सरकार की तैयारी

सरकार ने संसद में अपनी कार्ययोजना पेश करते हुए बताया कि पानी बचाने के लिए कई मोर्चों पर काम चल रहा है. सरकार ने बताया कि जल शक्ति अभियान के तहत वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) और पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जा रहा है. वहीं, अटल भूजल योजना विशेष रूप से उन जिलों के लिए है जहां पानी का स्तर बहुत नीचे जा चुका है. अमृत सरोवर मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य हजारों नए तालाब बनाना है ताकि बारिश का पानी बहकर बर्बाद न हो. इसके साथ ही सरकार अब पानी बचाने को एक जन-आंदोलन बनाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि बिना जनता के सहयोग के भूजल स्तर सुधारना मुमकिन नहीं है.

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