नई दिल्ली. हाल ही संपन्न हुए पांच राज्यों के चुनाव में किसानों का मुद्दा छाया रहा. ऐसा कहा जा रहा है कि हिंदी पट्टी के तीनों राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान को कांग्रेस ने किसानों के कर्जमाफी सहित कई मुद्दे पर ही जीता है. इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी साल 2019 में चुनाव जीतने पर पूरे देश में किसानों की कर्जमाफी का वादा कर दिया है. ऐसे में अब केंद्र सरकार हरकत में आ गई है. वह किसानों के हित में कुछ ऐसे फैसले पर विचार कर रही है, जिससे उन्हें बड़े स्तर पर फायदा हो सके.

इकॉनमिक टाइम्स ने अधिकारिक सूत्रों के हवाले से लिखा है सरकार परेशान किसानों के हित किसान क्रेडिट कार्ड (KCCs) के तहत मिलने वाले लोन को दोगुना करके दो लाख रुपये करने की योजना है. इसके साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को फसल इंश्योरेंस स्कीम के तहत बदलने भी योजना है जिससे कवरेज को बढ़ाया जा सके और क्लेम्स के सेटलमेंट में तेजी लाई जा सके.

दो मंत्रालयों से निति आयोग ने की बात
रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग ने इस बाबत कृषि मंत्रालय और वित्रमंत्रालय से सभी संभावित कदमों को लेकर बातचीत की है. इसमें किसानों की कर्ज माफी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. आयोग स्ट्रक्चरल रिफॉर्म के लिए कई प्रयास के बारे में सोच रहा है. उसका कहना है कि कर्जा माफी अंतिम उपाय नहीं है, लेकिन अंतिम निर्णय राजनैतिक कॉल पर ही लिया जाएगा.

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बैंकर से भी हुई है बात
रिपोर्ट में एक सिनियर बैंकर के माध्यम से कहा गया है कि फसल बीमा योजना में कुछ बदलाव की जगह केसीसी लिमिट को भी बढ़ाने पर भी बात हुई है. कृषि कर्ज के वर्गीकरण पर भी इसमें बात हुई है. वर्तमान में नए कर्ज पर किसान प्रिंसिपल और इंट्रेस्ट दोनों दे रहे हैं. रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि आने वाले बजट में किसानों को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

केसीसी अकाउंट पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय 40 मिलियन केसीसी अकाउंट हैं, जिसमें 2.37 लाख करोड़ रुपये हैं. केसेसी की गाइडलाइन के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंक को एक लाख रुपये तक कर्ज देने की अनुमति देते हैं. ऐसे में सरकार उसे दो से तीन लाख रुपये तक करने की योजना पर बात कर रही है. इसके साथ ही केसीसी को रूपे एटीम-कम-डेबिट किसान क्रेडिट कार्ट के तौर पर भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है.