श्रीनगर: जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर घाटी में इंटरनेट पर रोक और धारा 144 पर रोक के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश के चंद घंटे बाद कश्मीर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सहित 26 लोगों पर लगा कड़ा जनसुरक्षा कानून (पीएसए) हटा लिया. इन 26 लोगों में से 11 लोग उत्तरी कश्मीर से और 14 लोग दक्षिणी कश्मीर से हैं. वहीं, कश्मीर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नजीर अहमद रोंगा भी इन लोगों में शामिल हैं. Also Read - 7th Pay Commission Latest News : इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों को होली पर मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

  Also Read - पाकिस्तान के प्रॉपेगेंडा का भारत ने कूटनीतिक तरीके से दिया जवाब, 20 देशों के राजनायिक पहुंचे कश्मीर घाटी

सूत्रों ने बताया कि इन लोगों को शनिवार को रिहा किए जाने की संभावना है. इनमें से कुछ केंद्रशासित प्रदेश से बाहर उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बंद हैं. जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने हाल में कुछ लोगों से पीएसए हटा दिया था और आदेश पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों पर तीखी टिप्पणी की थी. तीन बार मुख्यमंत्री रहे एवं वर्तमान में लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला पर भी 17 सितंबर को पीएसए लगा दिया गया था. इसके बाद एमडीएमके नेता वाइको ने उच्चतम न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उनकी पेशी की मांग की थी.

सभी प्रतिबंधों की एक सप्ताह के भीतर समीक्षा
उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित दर्जनों अन्य नेताओं को एहतियातन हिरासत में रखा गया है. इससे पहले आज उच्चतम न्यायालय ने अपनी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था में इंटरनेट के इस्तेमाल को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार करार दिया और जम्मू कश्मीर प्रशासन से कहा कि केन्द्रशासित प्रदेश में सभी प्रतिबंधों की एक सप्ताह के भीतर समीक्षा की जाए.