नई दिल्ली: कोरोना वायरस के बीच चल रहे लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है. अपने घरों से दूर लोगों को आवाजाही की इजाजत मिल गई है. कुछ शर्तों के साथ जिन्हें छूट देने की बात कही गई है, उनमें प्रवासी कामगारों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्र शामिल हैं. लॉकडाउन में ये छूट कुछ शर्तों के साथ दी जा रही है. लॉकडाउन तीन मई को ख़त्म हो रहा है, इससे पहले ही सरकार ने ये फैसला किया. ऐसी भी संभावना है कि लॉकडाउन कुछ शर्तों के साथ बढ़ाया जा सकता है. Also Read - मध्य प्रदेश: कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 8,283 तक पहुंचा, 385 में सबसे ज्यादा मौतें इंदौर में

गृहमंत्रालय के अनुसार- सभी राज्यों को फंसे हुए लोगों को भेजने, अपने यहां बुलाने के लिए नोडल प्राधिकारी नियुक्त करने होंगे और मानक प्रोटोकॉल तैयार करना होगा. नोडल अधिकारी अपने राज्यों या केंद्र शासित क्षेत्रों में फंसे लोगों को पंजीकृत करेंगे. अगर फंसे हुए लोगों का समूह एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना चाहता है तो राज्य एक-दूसरे से परामर्श कर सड़क मार्ग से आवाजाही पर परस्पर सहमत हो सकते हैं. Also Read - वर्क फ्रॉम होम: 'बॉस' रात में करते हैं VIDEO CALL, कम कपड़ों में करते हैं मीटिंग, परेशान हैं महिलाएं

बता दें कि 24 मार्च को लॉकडाउन के बाद से ही जो जहां था वहीं फंसा रह गया. श्रमिक मजदूरों सहित अन्य लोग भी इससे काफी प्रभावित हुए. लाखों मजदूर तो कोई साधन न होने की स्थिति में पैदल ही निकल पड़े. सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचे. कई दिनों तक ये सिलसिला चला. पैदल चलने के कारण कई लोगों की मौत भी हुई. कई राज्यों की सरकारों ने बसों का इंतज़ाम किया, लेकिन ये नाकाफी साबित हुआ. यूपी सरकार ने तो कोटा में फंसे हज़ारों छात्रों को करीब 200 बसें भेजकर बुलवा लिया, इसके बावजूद अब भी बहुत लोग अपने घरों से दूर फंसे हुए हैं. महाराष्ट्र और गुजरात में मजदूर घर जाने की मांग को लेकर सड़कों पर भी उतर चुके हैं. Also Read - लॉकडाउन के चलते इस राज्य के मंदिरों को हुआ 600 करोड़ का नुकसान, सालाना आय में आई बड़ी कमी