नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के खाद्य महकमे ने घर पर राशन की आपूर्ति योजना की फाइल को विधि विभाग को भेजा है. इसके बाद आप सरकार ने केंद्र पर हमला करते हुए उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले की ‘विकृत’ व्याख्या का इस्तेमाल कर नौकरशाहों के जरिए ‘फाइलों का खेल’ खेलने का आरोप लगाया.

खाद्य विभाग ने फाइल को विधि विभाग को मामले पर उसकी राय लेने के लिए रेफर किया है. छह जुलाई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने योजना पर सभी आपत्तियों को ‘खारिज’ कर दिया था और इसे मंजूरी दे दी थी. एक अधिकारी ने बताया कि फाइल को विधि महकमे का नजरिया जानने के लिए उसके पास भेजा है कि योजना पर केंद्र की मंजूरी के बिना अमल किया जा सकता है या नहीं क्योंकि यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत आता है.

घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह अफसरों और उपराज्यपाल की ‘मिलीभगत’ दिखाता है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘यह खबर स्पष्ट तौर पर अधिकारियों और उपराज्यपाल की मिलीभगत दिखाती है. यह स्पष्ट है कि अधिकारियों से काम बंद करने को कहा जा रहा है.’’

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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि केंद्र उच्चतम न्यायालय के फैसले का पालन नहीं करके उसे परेशान कर रहा है जो दिल्ली सरकार को भूमि, पुलिस और लोक सेवा को छोड़ अन्य विषयों पर फैसला करने का अधिकार देता है. उन्होंने घर पर राशन की आपूर्ति योजना, सीसीटीवी कैमरा परियोजना, डीएसआईडीसी कर्मचारियों को बोनस के मामले का हवाला दिया जिनमें नौकराशाहों द्वारा ‘रूकावट’ पैदा करने की वजह से परेशानी हो रही है.

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उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, ‘‘केंद्र ने एक अधिसूचना के जरिए सेवा से जुड़े मामले को उपराज्यपाल के पास रखा है. यह परेशान करना है ताकि हमारे फैसले को लागू नहीं किया जाए क्योंकि अधिकारी उनकी ओर हैं.’’ सिसोदिया ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को देखना चाहिए कि सेवा से जुड़े मामलों पर दिल्ली सरकार को नियंत्रण नहीं देकर कैसे उसके फैसले का ‘मजाक’ बनाया जा रहा है.

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सिसोदिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के खाद्य आयुक्त ने घर पर राशन आपूर्ति करने की योजना को लागू करने से ‘इनकार’ कर दिया है. उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने कहा है कि वह विधि विभाग से सलाह-मशविरा करेंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की विकृत व्याख्या का इस्तेमाल करके आयुक्तों और आईएएस अधिकारियों के जरिए फाइलों का खेल खेला जा रहा है.’’ उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार घर पर राशन आपूर्ति योजना के जरिए जन वितरण प्रणाली में राशन की काला बाजारी पर काबू पाना चाहती है, मगर भाजपा, केंद्र और उपराज्यपाल अधिकारियों के माध्यम से इसमें रूकावट डाल रहे हैं जो उनकी मंशा पर सवाल उठाती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने चार जुलाई को दिए फैसले में कहा था कि लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़ अन्य मामलों में दिल्ली सरकार को कानून बनाने का अधिकार है. शीर्ष अदालत ने उपराज्यपाल के अधिकारों में कटौती की थी.