पुणे. तीन हिंदी भाषी राज्यों में हाल में भाजपा की हार के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ‘‘नेतृत्व’’ को ‘‘हार और विफलताओं’’ की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए. गडकरी ने कहा कि सफलता की तरह कोई विफलता की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता. गडकरी के इस बयान को हाल में तीज राज्यों के रिजल्ट से जोड़कर देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बिजेपी को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है.

गडकरी ने कहा, सफलता के कई दावेदार होते हैं लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं होता. सफलता का श्रेय लेने के लिये लोगों में होड़ रहती है लेकिन विफलता को कोई स्वीकार नहीं करना चाहता, सब दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं. वह यहां पुणे जिला शहरी सहकारी बैंक असोसिएशन लिमिटेड द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

केंद्रीय बैंकों का सहकारी बैंक का साथ देना चाहिए
इससे पहले नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्रीय बैंकों को सहकारी बैंकों का साथ देना चाहिए. इससे उन्हें खराब हालात से उबारा जा सकता है. उनके इस बयान को सरकार की उस घोषणा से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सरकार ने सरकारी बैंकों को और 83,000 करोड़ रुपये देने की बात कही है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी घोषणा की थी.

एनपीए ये बोले
गडकरी ने आगे कहा कि प्राइवेट कर्जदाता भी 100 रुपये का कर्ज देता है तो कई बार उसके 15 रुपये डूब जाते हैं. किसी भी बैंक के लिए बिना एक भी अकाउंट एनपीए हुए तो 100 फीसदी फाइनेंस करना संभव नहीं है. क्योंकि आज का एक अच्छा अकाउंट कल एनपीए हो सकता है और यह बिजनस में रिस्क फैक्टर की वजह से होता है.