नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को नई वीवीपीएटी (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीनें खरीदने के चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत तीन हजार करोड़ रुपये की नई ईवीएम मशीनें खरीदी जाएंगी जिसमें वोट डाले जाने के बाद कागज की रसीद प्रिंट होकर निकलती है. सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में किया है जब विपक्षी दलों की ओर से आने वाले सभी चुनाव में ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल मशीन के उपयोग की मांग तेज हो रही है ताकि इस बारे में संदेह को दूर किया जा सके.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में चर्चा के बाद वीवीपीएटी यूनिटों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. चुनाव आयोग ने देश के सभी मतदान केंद्रों के लिए 16 लाख से अधिक पेपर ट्रेल मशीनों की खरीद के लिए 3,174 करोड़ रुपये मांगे हैं. कैबिनेट ने नए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की खरीद के लिए अब तक दो किस्तों में 1,009 करोड़ रुपये और 9,200 करोड़ रुपये को मंजूरी दे चुकी है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से वर्ष 2013 में कहा था कि आयोग नई वीवीपीएटी मशीनें का इस्तेमाल चरणों में शुरू करे. कोर्ट के आदेश पर 2019 में होने वाला अगला लोकसभा चुनाव पूरी तरह नई वीवीपीएटी मशीनों से कराया जाएगा. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से वीवीपीएटी मशीनों से चुनाव कराने पर हो रही देरी को लेकर जवाब मांगा था.

जून 2014 के बाद से आयोग ने सरकार को वीवीपीएटी मशीनों की खरीद के लिए कोष जारी करने के संबंध में कम से कम 11 बार याद दिलाया है. पिछले वर्ष चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस ओर दिलाया था.

16 राजनीतिक दलों ने हाल ही में चुनाव आयोग के सामने अपने ज्ञापन में पारदर्शिता के लिए पेपर बैलेट प्रणाली लागू करने को कहा था. बीएसपी, आप, कांग्रेस ने ईवीएम में कथित छेड़छाड़ के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा था.

भाषा से इनपुट के साथ