नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का बचाव करते हुए, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र ने मंगलवार को दावा किया कि कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है. केंद्र ने संशोधित नागरिकता कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में अपना जवाब दायर किया है. Also Read - केंद्र सरकार की नई एडवाइजरी: सीमाएं सील करें राज्य, लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों को 14 दिन का क्वारंटाइन

केंद्र ने विवादास्पद अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में अपने 129 पृष्ठ के हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह कानून किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता और इससे संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन होने का कोई सवाल नहीं उठता. Also Read - सात महीने की हिरासत के बाद रिहा होंगे उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जारी किए आदेश

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, “सीएए केंद्र को मनमानी शक्तियां नहीं देता, नागरिकता इस कानून के तहत निर्देशित तरीकों से दी जाएगी.” Also Read - कोरोनावायरसः पुलिस ने खाली कराया शाहीन बाग, सौ दिन से चल रहा था CAA के खिलाफ प्रोटेस्ट

इसे ‘कानूनी और संवैधानिक’ करार देते हुए केंद्र ने कहा कि अधिनियम पर सवाल नहीं उठाए जा सकते क्योंकि यह संसद की संप्रभु शक्ति से जुड़ा मामला है. केंद्र ने यह भी कहा कि सीएए कार्यपालिका पर किसी भी मनमानी और अघोषित शक्तियां प्रदान नहीं करता है क्योंकि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के सताए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान की जाएगी, जो नागरिकता प्रदान करने वाले कानून के तहत निर्दिष्ट है.

बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सीएए की संवैधानिक वैधता की जांच करने का फैसला किया था, लेकिन इसके लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. विशेष रूप से, राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस के सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी सहित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की गई थीं.