30 दिन जेल में रहे तो हट सकते हैं PM-CM! मानसून सत्र में सरकार ला रही ये बिल, कैसे जुटाएगी दो-तिहाई बहुमत?
विपक्षी दलों में लगातार हो रही इस टूट-फूट से संसद में NDA की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है. क्योंकि, इससे NDA संसद में दो-तिहाई बहुमत की स्थिति के बेहद करीब पहुंच रहा है.
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिली. (PTI)
- TMC के 20 सांसदों का NCPI में विलय
- लोकसभा में NCPI करती है NDA को सपोर्ट
- शिवसेना UBT के 6 सांसद भी शिंदे गुट में होंगे शामिल
- 20 जुलाई में शुरू होगा संसद का मानसून सेशन
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है. ये 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. मानसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 में को पेश कर सकती है. इस बिल में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान है. ये बिल पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया था. अब इसे फिर से संसद में लाए जाने की चर्चा है.
सवाल ये है कि सरकार इस बिल को क्यों ला रही है? विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है? क्या मोदी सरकार के पास इस बिल को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त संख्याबल है:-
क्या है प्रस्तावित बिल?
संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का मकसद संविधान के आर्टिकल 75, 164 और 239AA में बदलाव करना है. इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री ऐसे अपराध में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है, जिसकी अधिकतम सजा 5 साल या उससे अधिक है, तो उसे पद छोड़ना होगा. अगर संबंधित व्यक्ति 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देता, तो उसका पद अपने आप खत्म हो जाएगा. बिल में ये भी कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति के रिहा होने के बाद उसके दोबारा नियुक्ति का रास्ता खुला रहेगा.
सरकार की दलील क्या है?
बिल के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि शासन व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने और संवैधानिक मर्यादा कायम रखने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है. सरकार का तर्क है कि गंभीर आपराधिक आरोपों में लंबे समय तक हिरासत में रहने वाला व्यक्ति मंत्री पद पर बना रहे, तो इससे सुशासन और सार्वजनिक विश्वास प्रभावित हो सकता है.
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विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारी या हिरासत को आधार बनाकर किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाना 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' के सिद्धांत के विपरीत हो सकता है. आलोचकों का यह भी कहना है कि राजनीतिक मामलों में एजेंसियों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए इस तरह का कानून विवाद खड़ा कर सकता है.
बिल को पास कराने के लिए क्या NDA के पास पर्याप्त संख्या है?
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (Special Majority) की जरूरत होती है. यानी मौजूदा और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या का भी बहुमत चाहिए.
पिछले कुछ दिनों में विपक्षी दलों में जिस तरह की भागमभाग देखी गई है, उसके हिसाब से लोकसभा में NDA के पास इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी नंबर होने की संभावना ज्यादा है. लेकिन, राज्यसभा में सहयोगी दलों और अन्य पार्टियों के समर्थन की भूमिका अहम होगी. इसलिए सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति बनानी पड़ सकती है.
अभी लोकसभा में क्या है NDA का नंबर गेम?
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिली. NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 सीटें आईं. अन्य दलों के 12 सांसदों ने भी NDA को सपोर्ट किया. कुल मिलाकर नंबर 292 होता है, जो बहुमत के आंकड़ें से 10 नंबर ज्यादा है. वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA के पास 233 सांसद हैं. इसमें कांग्रेस के अकेले 90 सांसद हैं. 14 सांसद ऐसे हैं, जो किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं.
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राज्यसभा में NDA के साथ कितने सांसद?
राज्यसभा की कुल 244 सीटों में से NDA के पास शुरू में 138 सांसद थे. 24 अप्रैल को AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने BJP में विलय कर लिया. इससे BJP की अकेले की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई. ऐसे में NDA के नंबर 145 हो गए हैं. फिर 11 जून को 12 राज्यसभा सीटों पर BJP के उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं. ऐसे में BJP के नंबर बढ़कर 125 हो गए हैं. NDA में भी 157 हो गए हैं.
विपक्षी दलों में टूट से कितना बदल सकता है संसद का नंबर गेम?
- 14 जून को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए. इससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया है.
- फिर महाराष्ट्र में उद्धव गुट 9 में से 6 लोकसभा सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में NDA की संख्या 318 हो जाएगा.
- दूसरी ओर, राज्यसभा में TMC के 4 सांसद इस्तीफा दे दिया है. इन सीटों पर उपचुनाव होंगे. उम्मीद है कि BJP ये सीटें जीत ले. ऐसे में आंकड़ा बढ़कर 154 हो सकता है.
क्या इससे BJP-NDA दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी?
इतना कुछ होने के बाद भी मोदी सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 44 सीटें दूर रहेगी. राज्यसभा में 10 सीटों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में NDA को अभी भी छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी.
NDA की मदद कर सकते हैं कौन से छोटे दल?
- अब दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) और आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस ही NDA का सहारा हैं.
- लोकसभा में फिलहाल DMK के 22 और JMM के 3 सांसद हैं. JMM अभी विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का हिस्सा है.
- तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK का गठबंधन टूट चुका है, क्योंकि कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ थलपति विजय की सरकार बनाने में मदद की थी. हालांकि, नेशनल लेवल पर DMK ने अभी तक INDIA से अलग होने को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है.
- ऐसे में अगर DMK औैर JMM के सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो NDA का आंकड़ा 343 तक पहुंच जाएगा. फिर भी ये नंबर दो-तिहाई बहुमत से 19 सीट कम पड़ेगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवाई ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “देश में 200-250 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस का वोट शेयर महज 4-5% है. ऐसे में 2029 में कांग्रेस को सीटें जीतने के लिए क्षेत्रीय दलों और छोटी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी. लिहाजा BJP पहले से ही इन पार्टियों का साथ पाने की कोशिश करेगी.”
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