लखनऊ: सत्तर के दशक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कभी खौफ का पर्याय रहा पूर्व कुख्यात डकैत मलखान सिंह अब ‘बागी’ बनकर चुनाव मैदान में है. 76 साल के मलखान सिंह राजपूत प्रदेश की धौरहरा सीट पर शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) से लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए जनता की अदालत में है. मलखान इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद, भाजपा की रेखा वर्मा और गठबंधन से बसपा के उम्मीदवार अरशद इलियास के खिलाफ चुनाव लड़ रहे है और यहां पांचवें चरण में छह मई को मतदान है.

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मलखान सिंह से जब उनके चुनाव के बारे में फोन पर बात की गई तो उसने कहा, ‘माहौल अच्छा है, मैं जीतूंगा, मेरी पार्टी मजबूत है और क्षेत्र में जहां-जहां जा रहा हूं, जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. ‘उससे जब पूछा गया कि लोग एक डकैत को वोट क्यों देंगे तो? इस पर मलखान ने कहा, ‘मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि यहां किसी के साथ किसी भी तरह की नाइंसाफी न हो. अगर मैं यहां का प्रतिनिधि हुआ तो लोगों को इसका फायदा मिलेगा.’

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अपनी पृष्ठभूमि को लेकर मलखान का कहना है, ”मैं डकैत नही था, मैं बागी था, जिसने आत्मसम्मान और आत्मरक्षा के लिए बंदूक उठाई थी. मैं जानता हूं कि असली डकैत कौन है और उनसे कैसे निपटा जा सकता है.’ 70 के दशक में मलखान और उनका गिरोह चंबल इलाके मे खौफ का पर्याय था, उनके खिलाफ 94 मामले दर्ज थे जिसमें डकैती के 18 मामले, अपहरण के 28, हत्या के प्रयास के 19 तथा हत्या के 17 मामले शामिल थे.

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मलखान ने जब आत्मसर्मपण किया था तो उनके सिर पर 70 हजार का इनाम घोषित था. मलखान ने 1982 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष आत्मसर्मपण किया था और उसके बाद मध्यप्रदेश के शिवपुरी में रहने लगा.