नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले चंदन मित्रा अब खुलकर टीएमसी की तारीफ कर रहे हैं. उन्होंने टीएमसी को प. बंगाल में नंबर वन पार्टी बताया और कहा कि इसे किसी से घबराना नहीं चाहिए. चंदन मित्रा ने बीजेपी छोड़ने के फैसले को सही करार दिया. उनका कहना है कि अपना मन बदलने का हर किसी को अधिकार होना चाहिए.

पुराने कॉलम पर दी सफाई

चंदन मित्रा ने आज कहा कि 5-6 साल पुराने एक कॉलम पर सफाई देते हुए कहा कि ये अब इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है? मुझे बदनाम करने के लिए ट्रोल्स ऐसा कर रहे हैं. बीजेपी का सीनियर नेता होने के नाते मैंने कुछ कमेंट किए थे. लेकिन हर किसी को अपना मन बदलने का अधिकार है.

बीजेपी नेता चंदन मित्रा TMC में शामिल, आडवाणी के थे करीबी

टीएमसी के सवाल पर उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि प. बंगाल में टीएमसी को घबराने की जरूरत है. उसकी लोकप्रियता को कोई छू नहीं सकता. बीजेपी अब यहां नंबर 2 है लेकिन बहुत बड़े फासले के साथ. वो भी सीपीएम की कीमत पर जो कमजोर हो चुकी है.

21 जुलाई को टीएमसी में हुए शामिल

राज्यसभा में एक बार नामित और दूसरी बार भाजपा की तरफ से निर्वाचित, वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा ने 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था. मित्रा के साथ सीपीएम से पूर्व सांसद मोइनुल हसन, कांग्रेस नेता सबिना यास्मिन और मिजोरम के एडवोकेट जनरल बिस्वजीत देव ने भी टीएमसी ज्वाइन किया.

2016 तक थे सांसद

बता दें कि मित्रा की राज्यसभा सदस्यता 2016 में समाप्त हुई है. पायनियर अखबार के प्रबंध निदेशक और संपादक, मित्रा को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का करीबी माना जाता है. विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यही वजह थी कि वर्तमान भाजपा नेतृत्व के साथ उनका तारतम्य नहीं बैठ सका. वहीं, पिछले दिनों यूपी में हुए कैराना लोकसभा के उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद चंदन मित्रा का पार्टी विरोधी बयान भी, उनके इस्तीफे की वजहों में से एक माना जा रहा है.