नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party) छोड़ने वालीं अलका लांबा (Alka Lamba) को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. वह 6 सितंबर 2019 को ही आम आदमी पार्टी छोड़ कांग्रेस (Congress) में शामिल हुईं थीं. अलका लांबा ने 2013 में आम आदमी पार्टी जॉइन की थी. इससे पहले वह 20 साल तक कांग्रेस से जुड़ी रही थीं. आप छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) ने अलका लांबा को को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका लगाई थी. इसके बाद अलका को अयोग्य घोषित कर दिया गया.

अलका लांबा चांदनी चौक (Chandni Chowk) से विधायक चुनी गईं थीं. अब उनकी विधायकी चली गई है. 6 सितंबर को असंतुष्ट विधायक अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी (Alka Lamba Resignation From Aam Admi Party) छोड़ने का एलान कर दिया था. पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा भी उन्होंने ट्विटर (Twitter) पर ही दिया था. उन्होंने ‘पार्टी छोड़ने का समय आ गया है’ लिखते हुए ट्वीट किया था. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा ट्विटर पर ही दिया. अलका लांबा ने इसके कुछ दिन पहले ही कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात की थी. आप छोड़ने के कुछ समय बाद ही वह कांग्रेस में शामिल हो गई थीं.

लांबा ने ट्वीट किया था, ‘‘आप को अलविदा कहने और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का समय आ गया है. मेरे लिए पिछले छह साल का सफ़र बड़े सबक सिखाने वाला रहा. सभी का शुक्रिया.” इसके करीब एक घंटे बाद अलका ने दूसरा ट्वीट किया ‘अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) जी आपके प्रवक्ता पूछते हैं कि मेरी ख्वाहिश क्या है. मैं ट्विटर पर ही इस्तीफ़ा दे रही हूं, उस आम आदमी पार्टी से जो खास आदमी पार्टी बन गई है.’

बता दें कि चांदनी चौक (Chandni Chowk) से आप विधायक रहीं लांबा ने इस्तीफे से पहले भी घोषणा की थी कि उन्होंने पार्टी छोड़ने और आगामी विधानसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ने का मन बना लिया है. लांबा पिछले कुछ समय से आप नेतृत्व खासकर पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली से नाराज़ चल रही थीं. केजरीवाल पर पार्टी में मनमानी करने का आरोप लगते हुए वह इसका सार्वजनिक तौर पर कई बार मुखर विरोध कर चुकी हैं.

लांबा और आम आदमी पार्टी के बीच पिछले कुछ समय से टकराव की स्थिति जो शुरू हुई, वह किसी न किसी रूप में चलती रही. लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने अपने राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से जवाबदेही मांगी थी. इसके बाद उन्हें पार्टी विधायकों के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया था. उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करने से इनकार कर दिया था और उन्होंने केजरीवाल के रोडशो के दौरान मुख्यमंत्री की कार के पीछे चलने के लिए कहे जाने के बाद रोडशो में भाग नहीं लिया था. लांबा और आप के बीच सबसे पहले टकराव राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) को दिए गए ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) सम्मान को वापस लिए जाने संबंधी प्रस्ताव पारित करने के पार्टी के फैसले को लेकर हुआ था. लांबा ने पार्टी के प्रस्ताव पर आपत्तियां उठाई थीं.