नई दिल्ली. आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा प्रमुख एन. चन्द्रबाबू नायडू ने शनिवार को विश्वास जताया कि राजनीतिक मजबूरी 2019 के चुनाव में राजग के खिलाफ लड़ने के लिए सभी गैर-भाजपा दलों को साथ ले आएगी. इस दौरान उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की.

राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं से मिलने के बाद नायडू ने कहा कि भरोसेमंद विकल्प मुहैया बनाने में वह सहायक की भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने कहा, सिर्फ राजनीतिक मजबूरी और देश के हित में सभी पार्टियां साथ आएंगी. कुछ शायद चुनाव के पहले साथ ना आएं, कुछ शायद चुनाव के बाद शामिल होंगे.

केजरीवाल-ममता कर रहे हैं काम
नायडू ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अभी भाजपा के दबाव के कारण शामिल होने से डर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ‘‘लोकतांत्रिक मजबूरियों’’ के कारण उन्हें कुछ नेताओं से भी मिलना होगा. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैकल्पिक मोर्चा के गठन के लिए किसी को उपत्प्रेरक बनना होगा. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल पहले से ही इस दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि तेदेपा ऐसे राज्य की क्षेत्रीय पार्टी है जहां 25 लोकसभा सीटें हैं और उनकी भूमिका सीमित है.

राजग का हिस्सा थी तेदेपा
इस साल मार्च तक तेलुगु देशम पार्टी राजग का हिस्सा थी. तेदेपा केन्द्र में सत्तारूढ़ गठबंधन से यह आरोप लगाते हुए अलग हो गयी थी कि सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिये जाने की मांग को खारिज कर दिया. हालांकि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक चली मुलाकात में क्या बातचीत हुई इसका पता तत्काल नहीं लग सका है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ मायावती के रूख को भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने के खिलाफ एक झटका के रूप में देखा जा रहा है. दूसरी ओर जन सेना नेता पवन कल्याण ने भी हाल ही में मायावती से मिलने की कोशिश की थी.