बेंगलुरु। चांद पर भेजे जाने वाले अपने अगले मिशन चंद्रयान-2 के लिए इसरो की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन ए. एस. किरन कुमार ने कहा कि तैयारियां चल रही हैं. ऑर्बिटर तैयार हो रहा है. फ्लाइट इंटीग्रेशन एक्टिविटी चल रही है और लैंडर व रोवर के लिए कई परीक्षणों की योजना है. कार्य प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 के पहले तिमाही में चंद्रयान-2 को लॉन्च करने पर काम कर रहे हैं.
चांद पर भेजे जाने वाला चंद्रयान-2 भारत का दूसरा मिशन है जो नौ साल पहले चांद पर भेजे गए चंद्रयान-1 मिशन का उन्नत संस्करण है. यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर का संयोजित मॉडल है.
बेंगलुरु की अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, चंद्रयान-1 से अलग चंद्रयान-2 में रोवर के साथ सॉफ्ट लैंडर भी होगा जो चांद की सतह पर अगले स्तर के वैज्ञानिक अध्ययन करेगा. इसरो ने चांद पर लैंडर के उतरने के लिए चांद जैसे भूभाग पर परीक्षण करने की सुविधा भी बनाई.
किरन कुमार ने कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय मिशन है, इसमें किसी और का सहयोग नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि चांद पर लैंडर के उतरने के बाद रोवर बाहर आएगा और वह मूल स्थान का अवलोकन करेगा और हम रेडियो संपर्क के जरिए इन अवलोकनों की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे.
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बेंगलुरु। चांद पर भेजे जाने वाले अपने अगले मिशन चंद्रयान-2 के लिए इसरो की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन ए. एस. किरन कुमार ने कहा कि तैयारियां चल रही हैं. ऑर्बिटर तैयार हो रहा है. फ्लाइट इंटीग्रेशन एक्टिविटी चल रही है और लैंडर व रोवर के लिए कई परीक्षणों की योजना है. कार्य प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 के पहले तिमाही में चंद्रयान-2 को लॉन्च करने पर काम कर रहे हैं.
चांद पर भेजे जाने वाला चंद्रयान-2 भारत का दूसरा मिशन है जो नौ साल पहले चांद पर भेजे गए चंद्रयान-1 मिशन का उन्नत संस्करण है. यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर का संयोजित मॉडल है.
बेंगलुरु की अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, चंद्रयान-1 से अलग चंद्रयान-2 में रोवर के साथ सॉफ्ट लैंडर भी होगा जो चांद की सतह पर अगले स्तर के वैज्ञानिक अध्ययन करेगा. इसरो ने चांद पर लैंडर के उतरने के लिए चांद जैसे भूभाग पर परीक्षण करने की सुविधा भी बनाई.