नई दिल्ली: SC/ST एक्ट को लेकर बवाल जारी है. इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं वहां अपर कास्ट इस एक्ट को लेकर विरोध कर रहा है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा था कि वह सुनिश्चित करेंगे कि नए संशोधित अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम का दुरुपयोग न हो. सीएम ने यह भी कहा था कि वह यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जांच से पहले किसी की गिरफ्तारी न हो.  देश में 35 सीटें एससी और 47 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं.

मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 15.2 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जनजाति की आबादी 21.10 प्रतिशत है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लेटर लिख साफ किया है कि संसद ने मामला दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच के प्रावधान को रद्द करने या अभियुक्त की गिरफ्तारी से पहले किसी अथॉरिटी की मंजूरी लेने के लिए अधिनियम में संशोधन किया है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. इन राज्यों में ओबीसी और सवर्ण समाज एससी एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है. मामला बहुत संवेदनशील है और देश में अशांति का महौल है. इसलिए संशोधित अधिनियम के बारे में उन्हें बताने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सूचित किया गया है. एससी एसटी एक्ट में हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद अग्रिम जमानत का प्रावधान खत्म कर दिया गया है और तत्काल गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं.

एससी-एसटी एक्ट का सवर्ण जातियां विरोध कर रही हैं. उनका मानना है कि दलित मतदाताओं को खुश करने के लिए एनडीए सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दलितों की नाराजगी और भारत बंद के बाद संसद ने 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी थी. नए कानून के तहत नई धारा 18 ए जोड़ी गई है. इसके मुताबिक जांच से पहले ही गिरफ्तारी संभव है. इस एक्ट के तहत केस दर्ज करने में आई गिरावट पर केंद्र ने चिंता जताई है. 2017 के NCRB डाटा के मुताबिक 2015-16 की तुलना में दलितों के खिलाफ अपराध में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.