नई दिल्ली: पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा सोमवार को भारतीय उच्चायोग के दो कर्मचारियों को ‘हिट एंड रन’ के एक मामले में कथित रूप से शामिल होने को लेकर हिरासत ले जाने के मामले में भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में दो भारतीय अधिकारियों को यातना देने के मुद्दे पर पाकिस्तानी उप उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय उच्चायोग के इन दो अधिकारियों को पाकिस्तानी एजेंसियों ने सोमवार को ‘बलपूवर्क अगवा’ किया और 10 घंटे से अधिक समय तक ‘अवैध हिरासत’ में रखा. Also Read - जम्मू-कश्मीर: LOC पर भारी गोलीबारी, पाकिस्तान ने बिना किसी उकसावे के फायरिंग की

बता दें कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारतीय उच्चायोग के दो कर्मचारियों को ‘हिट एंड रन’ के एक मामले में कथित रूप से शामिल होने को लेकर हिरासत में लेने के कुछ घंटे के बाद छोड़ दिया. इस मामले पर मंगलवार को सामने आया कि भारतीय अधिकारियों से पूछताछ की गई और शारीरिक यातनाएं दी गई. खुद विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारियों को पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा जबरन अगवा किया गया और दस घंटे तक अवैध हिरासत में रखा गया.” Also Read - Pakistan Coronavirus latest Update: पाकिस्तान में कोरोनावायरस के 3,387 नए मामले सामने आए, संक्रमितों की संख्या 2 लाख 25 हजार से अधिक

मंत्रालय ने कहा, ‘‘उन्हें इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग और दिल्ली में विदेश मंत्रालय के सख्त हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया.’’ विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘उनकी वीडियोग्राफी की गयी और मनगढ़ंत आरोपों को कबूल करने के लिए बाध्य किया गया. उच्चायोग के जिस वाहन में वे जा रहे थे, वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है.’’ उसने कहा कि भारत ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी अफसरों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी अधिकरियों की पूर्व नियोजित, गंभीर और उकसावे वाली कार्रवाई से पहले पिछले कई दिन से उच्चायोग के अधिकारियों पर निगरानी रखी गयी और डराया-धमकाया गया. यह सब इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के सामान्य कामकाज को अवरुद्ध करने के लिए किया गया था.’’

उसने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भारतीय अफसरों पर लगाये गये झूठे और मनगढ़ंत आरोपों को पूरी तरह खारिज किया जाता है. उसने कहा, ‘‘पाकिस्तान के ये कृत्य न केवल 1961 के कूटनीतिक संबंधों पर वियना समझौते का घोर उल्लंघन है, बल्कि राजनयिक अधिकारियों के साथ बर्ताव की संहिता का भी उल्लंघन है.’’