नयी दिल्ली: महिलाओं के खिलाफ अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए संसद की एक समिति ने ऐसे मामलों में 30 दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने, आरोपियों को जमानत नहीं देने और ऐसे मामलों को छह माह के भीतर निस्तारित करने का सुझाव दिया है. भाजपा नेता सत्यनारायण जटिया की अध्यक्षता वाली मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति ने महिलाओं की सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट गुरूवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की. समिति ने नवंबर 2019 में एक युवती के साथ जघन्य बलात्कार एवं बाद में उसकी हत्या किए जाने की घटना पर पीड़ा जताते हुए अपनी रिपोर्ट में इस प्रकार की घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाये जाने का सुझाव दिया. Also Read - वोटर ID Card को Aadhaar से लिंक करने की पैरवी संसदीय समिति ने की, ये होगा फायदा

समिति ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं का बढ़ना चिंताजनक है. समिति ने ध्यान दिलाया कि 2012 में महिलाओं के विरूद्ध अपराध की संख्या 244270 थी जो 2017 में बढ़कर 359849 और 2018 में 378277 हो गयी. रिपोर्ट में इस बात को लेकर चिंता जतायी गयी कि तमाम कानून एवं कानूनी ढांचा होने के बावजूद देश में महिलाओं के प्रति अपराध में कोई कमी नहीं आ रही है. समिति ने सिफारिश की कि महिलाओं से जुडे कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाये, महिलाओं के खिलाफ अपराध में 30 दिन के भीतर आरोपपत्र दायर किया जाये, आरोपियों को जमानत नहीं दी जाये तथा मामले को छह महीने के भीतर निस्तारित किया जाए ताकि पीड़िताओं को समय पर न्याय मिल सके. Also Read - पति ने अपनी ही पत्नी से 4 दोस्तों के साथ मिलकर किया गैंगरेप, प्रेग्नेंट हुई महिला, मुकदमा दर्ज

समिति ने ध्यान दिलाया कि बलात्कार के 86 प्रतिशत मामलों में आरोपपत्र दायर होने पर दोष सिद्धि केवल 32 प्रतिशत मामलों में हो पाती है. समिति ने गृह मंत्रालय से सिफारिश की है कि दो साल के भीतर प्रत्येक राज्य की राजधानी में एक फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित की जाए ताकि अपराधियों के खिलाफ मजबूती से मामला पेश किया जा सके. Also Read - गर्लफ्रेंड से मिलने को रोका, तो थाना इंचार्ज ने पत्नी को पुलिस के सामने ऐसे पीटा, VIDEO VIRAL