चेन्नई: केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया है कि यदि बच्चे दिवाली के दौरान उच्चतम न्यायालय द्वारा लगाई गई पाबंदी की अवधि के दौरान पटाखे छोड़ते हैं तो क्या उन्हें दंडित किया जाएगा? इस पर द्रमुक ने कहा कि ऐसा कोई बयान नहीं दिया जाए जो शीर्ष अदालत की अवमानना करता हो. उन्होंने हाल में नागरकोइल में कहा कि ‘पटाखे छोड़ने वाले बालिग नहीं, उनमें 90 फीसद बच्चे होते हैं… आप उनके साथ क्या करने जा रहे हें…. क्या आप उन पर कानून लगायेंगे?’ Also Read - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई सहित 6 शहरों से कोलकाता के लिए कोई यात्री उड़ान नहीं होगी

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उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार स्पष्टत: शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने के लिए हर घर पर पुलिसकर्मी तैनात करेगी. उन्होंने कहा कि दिवाली लोगों का त्योहार है, दो महीने में क्रिसमस है, तब ऐसे में इस प्रकार की पाबंदियां तब भी होंगी. राधाकृष्णन के बयान पर द्रमुक प्रवक्ता कांस्टैंटाइन रवींद्रन ने कहा कि ‘केंद्रीय मंत्री क्या कर रहे हैं?

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जिन्हें वह बच्चे कह रहे हैं, वे अपने आप ही ऐसा नहीं करते हैं (यानी पटाखे नहीं छोड़ते हैं) वे अपने माता-पिता की निगरानी में ऐसा करते हैं. उसी स्थिति को ध्यान में रखकर उच्चतम न्यायालय ने अच्छी बात के हक में फैसला दिया है. हमें अधिकतम सीमा तक उसका पालन करना चाहिए. यह हकीकत है. शीर्ष अदालत अभिभावकों के लिए है.