बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उसने अदालत के पूर्व के उस आदेश की पुनरीक्षा का अनुरोध किया था जिसमें सीबीआई को राज्य में 10 वर्ष की अवधि के दौरान दिव्यांगों के लिए दी गई राशि में 1000 करोड़ रुपये के घोटाले में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने को कहा गया था. उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी को कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था.

अदालत ने यह आदेश अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर के जरिये 2018 में दायर कुंदन सिंह ठाकुर की जनहित याचिका पर सुनाया था जिसमें आरोप लगाया था कि राज्य के समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित राज्य संसाधन केंद्र (एसआरसी) के कोष में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई. याचिकाकर्ता ने दो पूर्व मुख्य सचिव सहित 12 मौजूदा एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया था. इस याचिका पर आए आदेश के बाद राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल किया था.

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की खंडपीठ ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने के बाद सात फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था और मंगलवार को आदेश की प्रति अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई.

अदालत ने मंगलवार के फैसले में कहा, ‘‘हमने मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा कराए जाने के मामले पर पुनर्विचार कर आदेश पारित किया है. यहां तक कि हमने मामले को सीबीआई को भेजा क्योंकि एसआरसी का प्रबंधन मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी करता है और जनहित अदालत के दिशानिर्देशों के बावजूद मामले की ठीक से जांच नहीं की और प्रभावी कदम राज्य प्रशासन की ओर से नहीं उठाए गए.’’

अदालत ने कहा कि जनहित याचिका में लगाए गए आरोप और पिछले साल अक्टूबर में मुख्य सचिव की ओर से पेश रिपोर्ट में पाया गया कि प्रथम दृष्टया सार्वजनिक धन में अनियमितता एवं गबन के आरोपों में तथ्य है. उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने पिछले हफ्ते अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.