रायपुर| छत्तीसगढ़ में मंत्री की कथित अश्लील सीडी मामले में गिरफ्तार पत्रकार विनोद वर्मा ने आज जमानत पर रिहा होते ही कहा कि उनकी न कोई राजनीतिक मंशा थी, न कोई उदेश्य था, वह सिर्फ पत्रकारिता करना चाह रहे थे. वर्मा देर शाम रायपुर के केंद्रीय जेल से जमानत पर रिहा हुए. जेल परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वर्मा ने कहा कि वह जमानत पर हैं और अभी पूरा मामला खुलना बचा है. उन्होंने कहा कि सरकार के, पुलिस के और सीबीआई के जो भी एकतरफा दावे हैं वह अखबारों में छपते रहे हैं और मीडिया में आते रहे हैं। इस मामले में उन्हें न कुछ कहने की जरूरत थी और न अभी कुछ कहना चाहते हैं. Also Read - Biwi Ka Pyar: बिना बताए मायके गई बीवी, दारू पीकर बिजली के खंभे पर चढ़ा, देखें Video

Chhattisgarh sex CD row: Journalist Vinod Verma gets bail from CBI court | छत्तीसगढ़: मंत्री सेक्स सीडी कांड के आरोपी विनोद वर्मा को मिली जमानत

Chhattisgarh sex CD row: Journalist Vinod Verma gets bail from CBI court | छत्तीसगढ़: मंत्री सेक्स सीडी कांड के आरोपी विनोद वर्मा को मिली जमानत

यह मामला जैसे..जैसे आगे बढ़ेगा, जांच होगी, वह जांच में हर तरह का सहयोग करेंगे. विनोद वर्मा ने कहा कि वह पहले दिन से कह रहे हैं कि वह सिर्फ पत्रकारिता कर रहे थे. वर्मा ने बताया कि उन्होंने देश के चार बड़े संपादकों को फोन किया था कि उनके पास एक वीडियो क्लिप आया हुआ है, इसके बारे में वह खबर बनाना चाहते हैं. इसके लिए उनकी न कोई राजनीतिक मंशा थी, न कोई उदेश्य था. वह सिर्फ पत्रकारिता करना चाह रहे थे. Also Read - Chhattisgarh Armed Force के हेड कॉन्‍स्टेबल दंतेवाड़ा में नक्सलियों की लगाई IED के ब्‍लास्‍ट में शहीद

वर्मा ने कहा कि एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया की ‘फैक्ट फाइंडिंग टीम’ थी उसमें वह यहां आए थे। उस समय अपनी रिपोर्ट में कहा था कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता करने की परिस्थितियां नहीं है. यहां पत्रकारिता करना बहुत ही मुश्किल है. Also Read - Chhattisgarh: महिला नक्सली की आत्महत्या को लेकर विपक्ष ने विधानसभा में मचाया हंगामा

यह बात बार..बार साबित होती है जो आंकड़े विधानसभा में रखे गए हैं कि कई पत्रकार गिरफतार हुए हैं. इस सरकार में पत्रकारिता करना बहुत की कठिन है। बहुत की खतरनाक है.

ब्लैकमेलिंग का आरोप लगने के सवाल पर वर्मा ने कहा कि उनके तीन नंबर हैं, उन्होंने सभी नंबर दे दिए हैं. 60 दिनों में मेरा एक भी नंबर जाहिर नहीं हुआ की मैंने ब्लैकमेलिंग किया है। मैं ब्लैकमेलिंग क्यू करूंगा. वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के लिए मैं कंसलटेंट की तरह काम कर रहा हूं. जो ट्रेनिंग कैंप हुए हैं उसे लेकर जो तिलमिलाहट बीजेपी के भीतर है उसकी खबर उनको मिलती रही है.

उन्होंने कहा कि वह अगर पत्रकार की तरह, एक प्रोफेशनल की तरह काम करना चाहते हैं और कर रहे हैं तब उससे अगर सरकार को तकलीफ है तो उस तकलीफ का इस तरह का परिणाम नहीं आना चाहिए.

विनोद वर्मा को लेने जेल परिसर पहुंचे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि यह एक न्यायिक प्रक्रिया है. 60 दिनों में चालान प्रस्तुत नहीं किया गया और इन्हें जमानत मिल गई. लेकिन सवाल इस बात का है कि जिस प्राथमिकी में विनोद वर्मा का नाम नहीं है. फोन नंबर नहीं है. फिरौती की कोई बात नहीं हुई है और 11 घंटे के भीतर बगैर गिरफ्तारी वारंट के आप विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लेते हैं.

यह पुलिस की प्रक्रिया तो नहीं है। पुलिस का काम करने का तरीका नहीं है. इससे स्पष्ट हो जाता है कि यह राजनीतिक दबाव के चलते की गई कार्रवाई है. गौरतलब है कि पत्रकार विनोद वर्मा को सीबीआई की विशेष अदालत ने सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.