नई दिल्लीः भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई आज अपने पद से रिटायर हो रहे हैं. रिटायरमेंट से एक दिन पहले शनिवार को उन्होंने पत्नी के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए. मंदिर के एक अधिकारी ने बताया कि न्यायमूर्ति गोगोई अपनी पत्नी के साथ शनिवार की शाम पहुंचे और कुछ देर तक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम अतिथिगृह में ठहरने के बाद उन्होंने सहस्र दीपालंकारा रस्म में भाग लिया. इसके बाद उन्होंने मंदिर में जाकर दर्शन किये. उन्होंने पास के तिरुचनूर में श्री पद्मावती देवी मंदिर में भी दर्शन किये.

चीफ जस्टिस गोगोई ने 9 नवंबर को दशकों पुराने राम मंदिर विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. उन्होंने राम मंदिर के पक्ष में अपना निर्णय दिया और इसके निर्माण के लिए सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर प्रारूप रेखा तैयार करने के भी आदेश दिए थे. शुक्रवार (15 नवंबर) को अपने अंतिम कार्यदिवस पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर एक में चार मिनट बिताए. प्रधान न्यायाधीश उन्होंने अपने उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे के साथ पीठ की अध्यक्षता की. रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में चीफ जस्टिस का पद संभाला था.

रंजन गोगोई 2012 से सुप्रीम कोर्ट में जज में जज है और अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने ऐसे बहुत से फैसले दिए जिनके लिए उन्हें याद रखा जाएगा. रंजन गोगोई को अयोध्या सहित जम्मू- कश्मीर और एनआरसी जैसे मामलों से जुड़े फैसले के लिए हमेशा याद किया जाएगा. अपने अंतिम कामकाजी दिन से दो दिन पहले एक और बड़ा फैसला सुनाया जिसमें उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी आरटीआई (RTI) के दायरे में आएगा.

इन सब के अलावा एक और ऐसी बात है जिसके लिए उन्हें लोग याद रखेंगे. जस्टिस रंजन गोगोई एक अनुशासन प्रीय वयक्ति हैं और अक्सर वे वकीलों को खराब ड्रेस के कारण डांट लगा देते थे. शुक्रवार को ही प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय ने विभिन्न मीडिया हाउसों के निजी साक्षात्कार के आग्रहों पर एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने साक्षात्कार नहीं दे पाने पर खेद जताया था.