करीब 206 करोड़ रुपए के कथित चिक्की घोटाले के मामले में महाराष्ट्र सरकार की मंत्री और बीजेपी नेता पंकजा मुंडे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)से क्लीन चिट मिल गई है। इसके पहले उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट से भी राहत मिली थी। महाराष्ट्र के महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा एक ही दिन में की गई 206 करोड़ रुपयों की खरीद को नियम विरुद्ध बताते हुए कांग्रेस ने इसकी शिकायत एसीबी से की थी। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने छह पेज का एक दस्तावेज एसीबी प्रमुख को सौंपते हुए मामले की जांच की गुहार लगाई थी।

पंकजा पर आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए घटिया क्वॉलिटी की चिक्की सप्लाई करने का आरोप था। पंकजा पर आरोप था कि निविदाएं आमंत्रित करने की बजाय 206 करोड़ रूपये की खरीद को एक ही दिन में 24 सरकारी प्रस्तावों के जरिये मंजूरी दे दी। सभी खरीदों को भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की पुत्री पंकजा मुंडे ने 13 फरवरी 2015 को एक दिन में ही 24 सरकारी प्रस्तावों को मंजूरी दी थी।

आपको बता दें घोटाला सबसे पहले 15 जून को उस समय सामने आया जब पंकजा मुंडे के कार्यालय को अहमदनगर जिला परिषद अध्यक्ष मंजूश्री गुंड का एक पत्र मिला जिसमें उन्होंने एकीकृत बाल विकास सेवाओं के तहत आदिवासी बच्चों को वितरित की जाने वाली चिक्की की गुणवत्ता के बारे में शिकायत की थी। नियमों के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा की खरीद सिर्फ ई-टेंडरिंग के जरिए की जा सकती थी।

याचिकाकर्ताओं ने 206 करोड़ रूपये के कथित चिक्की घोटाले की जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस से कराने की मांग की थी। इस मामले में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे आरोपों के घेरे में आई थीं। आदिवासी बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं की खरीद में 206 करोड़ का घोटाला का आरोप लगाया गया था। कहा जा रहा था कि इस खरीद के लिए बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा ने नियमों को ताक पर रखकर इजाजत दी थी।

एक अखबार के मुताबिक पंकजा मुंडे को अहमदनगर जिला परिषद के प्रेजिडेंट मंजूश्री गुंड ने लेटर भेजा था। इस लेटर में मंजूश्री ने आदिवासी छात्रों को इंटिग्रेटेड चाइल्ड डिवेलपमेंट सर्विसेज (ICDS) के तहत दी जा रही चिक्की की क्वॉलिटी पर सवाल उठाए थे। मंजुश्री ने लिखा था कि चिक्की में मिट्टी लगी हुई है और यह खाए जाने लायक नहीं है।

आरोप था कि पंकजा ने ही 206 करोड़ रुपये में चिक्की, दरी, डिश और किताबों वगैरह को खरीदने के लिए नियमों को ताक पर रखकर क्लियरेंस दी थी। राज्य प्रशासन के रिकॉर्ड के मुताबिक 24 सरकारी रिजॉल्यूशंस के तहत इस डील को क्लियरेंस दी गई थी। नियमों के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा की खरीद सिर्फ ई-टेंडरिंग के जरिए की जा सकती है।