
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
लद्दाख की पहाड़ियों पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. पैंगोंग झील के आसपास चीन की नई गतिविधियों ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में जारी हुई सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि चीन भारत की सीमा से महज करीब पांच किलोमीटर दूर, बफर जोन के पास, स्थायी कंक्रीट ढांचे खड़े कर रहा है. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद इसे चीन की अब तक की सबसे गंभीर और ठोस गतिविधि माना जा रहा है. तस्वीरें बता रही हैं कि बीजिंग बातचीत और शांति की बात तो करता है, लेकिन जमीन पर हालात बदलने की कोशिशें लगातार जारी रखे हुए है. यही वजह है कि पैंगोंग झील एक बार फिर रणनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है.
दिलचस्प बात यह है कि यह गतिविधि ऐसे समय सामने आई है, जब 2024 में भारत और चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें हुई थीं. दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत बढ़ी, पैट्रोलिंग फिर से शुरू हुई और सीमावर्ती इलाकों में हालात कुछ हद तक सामान्य होते दिखे. लेकिन अब जो नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, वे उस नाजुक शांति पर सवाल खड़े कर रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की यह चाल यह संदेश देती है कि वह बातचीत के मंच पर नरमी दिखाते हुए भी जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है.
जियो-स्ट्रैटेजिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे के पास चीनी नियंत्रण वाले इलाके में जो ढांचे बन रहे हैं, वे अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी सैन्य निर्माण की ओर इशारा करते हैं. इन कंक्रीट स्ट्रक्चर्स को पीएलए की मौजूदा पोस्ट से आगे बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में सैनिकों की लंबी तैनाती आसान हो सकती है. माना जा रहा है कि इनका इस्तेमाल न सिर्फ सैनिकों के रहने, बल्कि लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और कमांड गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है. यह साफ संकेत है कि चीन किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार रख रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन यह सब अपनी लंबी रणनीति के तहत कर रहा है, जिसे अक्सर फैक्ट ऑन ग्राउंड बनाने की नीति कहा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन सीमावर्ती इलाकों में भारत की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है. ऐसे में भारत के लिए यह एक चेतावनी है कि कूटनीति के साथ-साथ सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी भी उतनी ही जरूरी है. सैटेलाइट निगरानी, तेज निर्माण और रणनीतिक धैर्य ही इसका जवाब हो सकते हैं. पैंगोंग झील के पास बन रहे ये कंक्रीट ढांचे यह याद दिलाते हैं कि एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए सतर्कता सबसे बड़ी जरूरत है.
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