China, India, Galwan Valley, PLA, Indian Army, Galwan valley clash, Latest News Updates: चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्‍वीकार किया है कि लद्दाख की गलवान घाटी Galwan Valley) में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर इंडियन आर्मी (Indian Army) से झड़प (confrontation) में चीनी सेना पीएलए के 5 सैनिकों की मौत हुई थी.Also Read - IPL 2022: RCB के लिए खेलना चाहते हैं Baby ABD डेवाल्ड ब्रेविस, ऑक्शन के लिए नाम दर्ज कराया

चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने शुक्रवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया कि पिछले वर्ष पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत की सेना के साथ हुई झड़प (Galwan clash) में उसके पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई थी. पीएलए ने 8 माह यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय की है जब पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट से दोनों देश अपने जवानों को हटा रहे हैं. Also Read - भारत, फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री के लिए 375 मिलियन डॉलर के सौदे पर करेंगे हस्ताक्षर

चीन की सेना के आधिकारिक अखबार ‘PLA DAILY’ की शुक्रवार की खबर के मुताबिक, सेंट्रल मिलिट्री कमिशन ऑफ चाइना (सीएमसी) ने उन पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों को याद किया जो काराकोरम पहाड़ियों पर तैनात थे और जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में मारे गए थे. Also Read - टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने को तैयार दीपक हुड्डा से बोले पठान- आपको बेहद मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा

मरने वालों में पीएलए के रेजिमेंटल कमांडर क्वी फबाओ भी शामिल थे
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘पीएलए डेली’ की खबर के हवाले से बताया कि गलवान में झड़प के दौरान मरने वालों में पीएलए की शिनजियांग सेना कमान के रेजिमेंटल कमांडर क्वी फबाओ भी शामिल थे. गलवान घाटी में झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे, लेकिन चीन अपनी सेना के मारे गए जवानों के बारे में चुप रहा है.

चाइनीज मीडिया में खबरें आईं 
चीन (China) ने पहली बार गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारतीय सेना से झड़प (confrontation) मारे गए अपने पांच सैनिकों के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी है, जिन्‍होंने पिछले साल (15 June 2020) भारतीय सेना (indian army) से झड़प में अपनी जान गंवाई थी. यह जानकारी चाइनीज मीडिया में तब सामने आई है, पूर्वी लद्दाख में जब भारत और चीन की सेनाएं पीछने हटने की प्रक्र‍िया के अंतिम दौर में हैं.

चीन अपने सैनिकों की मौत के लेकर 8 माह तक चुप्‍पी साधे रहा 
चीनी मीडिया (Chinese media) के मुताबकि, चीन पहली बार गलवान घाटी में अपने शहीद हुए 5 सैनिकों के नाम और विस्‍तार से उनकी कहानी बताई है, जिन्‍होंने 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय सेना से झड़प में अपनी जान गंवाई थी. बता दें कि गलवान घाटी में पिछले साल 15 जून को चीनी बलों के साथ संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे. चीनी सेना के जवान भी इस दौरान हताहत हुए थे, जिनकी संख्‍या लगभग 40 से ज्‍यादा थी, लेकिन चीन अपने सैनिकों की मौत के लेकर 8 माह तक चुप्‍पी साधे रहा है.

15 जून को गलवान घाटी में हुई  थी झड़प
गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. चार दशक से भी अधिक समय में भारत-चीन सीमा पर हुई यह सबसे हिंसक झड़प थी. पीएलए ने यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय की है जब पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट से दोनों देश अपने जवानों को हटा रहे हैं.

पीएलए के मृतकों को प्रथम श्रेणी की उत्कृष्टता” से सम्मानित किया
पीएलए की हाइ कमान सीएमसी ने क्वी फबाओ को ”सीमा की रक्षा करने वाले नायक रेजिमेंटल कमांडर” की उपाधि दी है. चेन होंगजुन को ”सीमा की रक्षा करने वाला नायक” तथा चेन शियानग्रांग, शियो सियुआन और वांग झुओरान को ”प्रथम श्रेणी की उत्कृष्टता” से सम्मानित किया.

यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकारा 
रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकार किया है कि गलवान में उसके सैन्यकर्मी मारे गए थे तथा उनके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 5 सैन्यकर्मी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में भारत की सेना का सामना करते हुए मारे गए.

गलवान घाटी की झड़प में चीन के 45 सैन्यकर्मी मारे गए थे: टीएएसएस
भारत ने घटना के तुरंत बाद अपने शहीद सैनिकों के बारे में घोषणा की थी लेकिन चीन ने शुक्रवार से पहले आधिकारिक तौर यह कभी नहीं माना कि उसके सैन्यकर्मी भी झड़प में मारे गए. रूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी टीएएसएस ने 10 फरवरी को खबर दी थी कि गलवान घाटी की झड़प में चीन के 45 सैन्यकर्मी मारे गए थे.

सिंघुआ विश्वविद्यालय में नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के अनुसंधान विभाग में निदेशक क्वियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि चीन ने घटना की जानकारी का खुलासा इसलिए किया है ताकि उन भ्रामक जानकारियों को खारिज किया जा सके जिनमें कहा गया था कि उक्त घटना में भारत के मुकाबले चीन को अधिक नुकसान पहुंचा था या फिर झड़प की शुरुआत उसकी ओर से हुई थी.